बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान सोमवार को सुबह 9 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। मतगणना 5 बजे से होगी और नतीजे उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव में विधानसभा के सभी 243 विधायक मतदान में हिस्सा ले रहे हैं।
पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान सोमवार को हो रहा है। सुबह 9 बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम 4 बजे तक चलेगी, और इसके बाद 5 बजे मतगणना होगी। नतीजे भी आज ही घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव में विधानसभा के सभी 243 विधायक भाग लेंगे। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार चार सीटों पर जीत लगभग पक्की मानी जा रही है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। यही कारण है कि इस बार का चुनाव विशेष रूप से रोचक बन गया है।
चार उम्मीदवारों की जीत लगभग तय
इस चुनाव में एनडीए ने कुल पांच उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा नेता नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा शामिल हैं। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। चार सीटें जीतने के लिए आवश्यक 164 वोट आसानी से पूरे हो जाते हैं, इसलिए इन चार उम्मीदवारों की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।
नीतीश कुमार की जीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय से बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा हैं। वहीं, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं की जीत भी बड़े राजनीतिक संतुलन को बनाए रखने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
पांचवीं सीट पर सियासी जंग
राज्यसभा चुनाव की सबसे रोमांचक लड़ाई पांचवीं सीट के लिए है। एनडीए ने इस सीट पर भाजपा के शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद के ए. डी. सिंह मैदान में हैं। इस सीट को लेकर दोनों गठबंधन बड़ी रणनीति के साथ अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
महागठबंधन के पास अपने 35 विधायकों के वोट माने जा रहे हैं, जिनमें राजद, कांग्रेस, माले और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं। यदि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पांच और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक विधायक का समर्थन मिल जाता है, तो महागठबंधन के उम्मीदवार की जीत की संभावना बन सकती है। यही कारण है कि इस सीट पर सियासी हलचल तेज है।

विधायकों की एकजुटता और रणनीति
मतदान से पहले दोनों गठबंधनों ने अपने विधायकों को पटना बुलाया है। महागठबंधन के विधायक एकजुटता बनाए रखने के लिए होटल पनाश में ठहराए गए हैं, जबकि एनडीए में मंत्रियों और नेताओं ने लगातार बैठकें कर विधायकों को मतदान प्रक्रिया और अनुशासन का संदेश दिया। चुनाव से कुछ घंटे पहले प्रशासनिक फैसले ने भी सुर्खियां बटोरीं। राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा सचिव ख्याति सिंह का तबादला कर उन्हें पटना हाईकोर्ट में OSD के पद पर भेज दिया गया। चुनाव प्रक्रिया पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रही।
साथ ही, मोकामा से विधायक अनंत सिंह, जो फिलहाल हत्या मामले में जेल में बंद हैं, ने अदालत से मतदान की अनुमति प्राप्त की और अब वह राज्यसभा चुनाव में वोट डाल पाएंगे।
समझिए चुनाव का गणित
बिहार में राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोट का कोटा तय है, जिसे ड्रॉप कोटा फॉर्मूले के अनुसार निर्धारित किया जाता है। कुल 243 विधायकों वाली बिहार विधानसभा में पांच सीटों के लिए यही गणित लागू होता है। इसलिए चार सीटों पर जीत का गणित साफ है, जबकि पांचवीं सीट पर केवल कुछ वोटों का अंतर ही जीत-हार तय करेगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया बिहार की विधानसभा में राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन रणनीति की स्पष्ट झलक देती है। विशेष रूप से पांचवीं सीट पर कड़ा मुकाबला यह दर्शाता है कि छोटे दलों और सहयोगियों के वोट भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।









