‘बिल्ली चली हज को’ तो अब ‘चूहे चले अंतरिक्ष’, चीन ने पहली बार 4 चूहे भेजे स्पेस स्टेशन, जानिए पूरा प्लान

चीन ने इतिहास रचते हुए पहली बार 4 चूहों को अपने स्पेस स्टेशन भेजा है। ‘बिल्ली चली हज को’ के बाद अब ‘चूहे चले अंतरिक्ष’ का दौर! जानिए इस मिशन का पूरा प्लान

‘बिल्ली चली हज को’ यह कहावत तो आपने जरूर सुनी होगी, मगर अब सुनिए - चूहे चले अंतरिक्ष! लेकिन यह कोई कहावत नहीं, बल्कि हकीकत है, जिसे चीन अब सच करने जा रहा है। दरअसल, चीन पहली बार अपने अंतरिक्ष स्टेशन के लिए शेनझोउ-21 अंतरिक्ष यान को शुक्रवार को प्रक्षेपित करने वाला है।

जिउक्वान: कहावत है, बिल्ली चली हज को, लेकिन अब वक्त है इसे नए अंदाज़ में सुनने का - चूहे चले अंतरिक्ष! ये कोई मज़ाक नहीं बल्कि चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा है। चीन ने शुक्रवार को अपने नए मानवयुक्त मिशन शेनझोउ-21 (Shenzhou-21) के तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चार चूहों को भी अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा है। 

यह पहली बार है जब चीन ने अपने स्पेस स्टेशन पर किसी अन्य जीव को वैज्ञानिक प्रयोग के रूप में शामिल किया है। यह मिशन चीन की तकनीकी क्षमता और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है।

शेनझोउ-21 मिशन की लॉन्चिंग

चीन का यह ऐतिहासिक मिशन उत्तर-पश्चिमी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर (Jiuquan Satellite Launch Center) से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।शेनझोउ-21 यान को तीन अंतरिक्ष यात्रियों कमांडर झांग लू (Zhang Lu), वू फेई (Wu Fei) और झांग होंगझांग (Zhang Hongzhang) — के साथ भेजा गया है।

झांग लू, जो इससे पहले शेनझोउ-15 मिशन का भी हिस्सा रह चुके हैं, इस अभियान के कमांडर हैं। वू फेई, मात्र 32 वर्ष के हैं और अब तक के सबसे युवा चीनी अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। वहीं झांग होंगझांग, एक पेलोड विशेषज्ञ (Payload Specialist) हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में जाने से पहले नई ऊर्जा और उन्नत सामग्रियों पर शोध किया था।

तीनों एस्ट्रोनॉट्स चीन के तियानगोंग स्पेस स्टेशन (Tiangong Space Station) में वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जहां यह टीम कई तकनीकी और जैविक अध्ययन मिशनों को अंजाम देगी।

क्यों भेजे जा रहे हैं चूहे अंतरिक्ष में?

इस मिशन का सबसे दिलचस्प पहलू है, चार चूहों की अंतरिक्ष यात्रा। चीनी विज्ञान अकादमी के इंजीनियर हान पेई (Han Pei) के अनुसार, इस मिशन में दो नर और दो मादा चूहों को भेजा गया है। इन चूहों पर निगरानी रखी जाएगी ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि: भारहीनता (Microgravity) की स्थिति में उनके शरीर और मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है।

सीमित और बंद स्थान (Confined Space) में लंबे समय तक रहने से उनके व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं। यह प्रयोग न केवल चूहों की शारीरिक स्थिति बल्कि उनके जैविक और मानसिक व्यवहार पर भी प्रकाश डालेगा। इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान मनुष्यों पर ऐसे वातावरण का क्या प्रभाव पड़ सकता है।

सरकारी मीडिया चाइना नेशनल रेडियो (CNR) के अनुसार, ये चूहे पांच से सात दिन तक अंतरिक्ष स्टेशन में रहेंगे और फिर शेनझोउ-20 यान के जरिए पृथ्वी पर लौटाए जाएंगे।

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