बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट कैसे मिला? मंत्री ईश्वर खंड्रे ने उठाए सवाल

कर्नाटक मंत्री ईश्वर खंड्रे ने BJP कार्यकर्ताओं पर फॉर्म-7 के जरिए मतदाता नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट पहले कैसे मिला।

कर्नाटक के मंत्री ईश्वर खंड्रे ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आधिकारिक प्रकाशन से पहले मतदाता सूची का ड्राफ्ट और डेटा कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचा।

बेंगलुरु: कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और डेटा की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की व्यापक जांच की मांग की।

फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर खंड्रे का आरोप

बुधवार को हासन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, चिक्कमगलुरु जाते समय खंड्रे ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा 250 से 300 तक पहले से भरे हुए फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जा रहे हैं।

खंड्रे के मुताबिक, इन आवेदनों के जरिए ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें कांग्रेस का समर्थक माना जाता है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में शामिल किसी पात्र नागरिक का नाम हटाने की प्रक्रिया का राजनीतिक इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किया जा रहा है, तो उसके पीछे मौजूद जानकारी आवेदकों तक कैसे पहुंची। खंड्रे ने दावा किया कि कई आवेदन ऐसे आरोपों के आधार पर दाखिल किए गए हैं कि संबंधित मतदाता दिए गए पते पर नहीं रहता या उसकी मृत्यु हो चुकी है।

‘प्री-पब्लिकेशन ड्राफ्ट बीजेपी कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचा?’

खंड्रे ने सबसे गंभीर सवाल चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अभी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और मतदाता सूची का ड्राफ्ट आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुआ है।

ऐसे में उन्होंने पूछा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के पास मतदाता सूची का प्री-पब्लिकेशन ड्राफ्ट कैसे पहुंचा। खंड्रे ने आरोप लगाया कि घटनाक्रम किसी संगठित और सुनियोजित प्रयास की ओर इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि यदि आधिकारिक प्रकाशन से पहले मतदाता सूची से संबंधित जानकारी कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक पहुंची है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है और मतदाता सूची में किसी भी तरह का अनधिकृत हस्तक्षेप गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

मतदाताओं का डेटा कहां से मिला?

खंड्रे ने यह भी सवाल किया कि फॉर्म-7 दाखिल करने वाले लोगों को मतदाताओं के व्यक्तिगत विवरण और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी कैसे मिली। उनका सवाल था कि आवेदकों को कैसे पता चला कि कोई मतदाता संबंधित पते पर नहीं रहता या उसकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल मतदाता का नाम हटाने के लिए किया जा रहा है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि डेटा किस स्रोत से हासिल किया गया।

मंत्री ने आरोपों की व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, उनके आरोपों पर बीजेपी की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बयान के समय सामने नहीं आई थी।

सूखे के बीच चारे के लिए 25 करोड़ रुपये

खंड्रे ने कर्नाटक में कम बारिश और सूखे की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण कई इलाकों में पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा होने की आशंका है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों और पशुपालकों को चारे की कमी का सामना न करना पड़े।

खंड्रे ने कहा कि सरकार सूखे की स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए 306 करोड़ रुपये

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति पर खंड्रे ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त धन उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ग्रामीण इलाकों में पेयजल समस्या से निपटने के लिए पहले ही 117 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे।

इसके बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रत्येक ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के लिए 189 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। खंड्रे के अनुसार, इन दोनों मदों को मिलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से संबंधित कार्यों के लिए कुल 306 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में पेयजल से जुड़े कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार जरूरत वाले क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठा रही है।

KPSC भर्ती में पारदर्शिता पर जोर

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के जरिए भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी खंड्रे ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और योग्य एवं मेधावी उम्मीदवारों को रोजगार का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित मामले में सरकार पहले ही जांच शुरू कर चुकी है। सरकार का उद्देश्य पात्र उम्मीदवारों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है।
खंड्रे ने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर किसी तरह का सवाल नहीं उठना चाहिए। योग्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिलना जरूरी है।

मतदाता सूची पर आरोपों से बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर खंड्रे के आरोप ऐसे समय आए हैं, जब चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है।फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति का नाम हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल होने पर उनकी वैधता और दावों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

खंड्रे ने सवाल उठाया है कि यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी, तो राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पास मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी कैसे पहुंची। उनके मुताबिक, इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मंत्री के आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, उनका बयान कर्नाटक में मतदाता सूची, SIR प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर एक नया विवाद खड़ा करता है।

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