IPS Vikram Dahiya Success Story: मां को खोया, बैंक बैलेंस हुआ जीरो, 4 बार असफल होकर भी बने IPS

IIM से MBA के बाद UPSC की तैयारी करने वाले विक्रम दहिया ने आर्थिक संकट और 4 असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और पांचवें प्रयास में IPS बने।

IIM से MBA के बाद कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने वाले विक्रम दहिया को आर्थिक संकट और लगातार चार असफलताओं का सामना करना पड़ा। मां के निधन के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और पांचवें प्रयास में IPS बने।

IPS Vikram Dahiya Success Story: UPSC की तैयारी के दौरान विक्रम दहिया ने आर्थिक तंगी, नौकरी में असफलता और मां को खोने का गहरा दुख झेला। कई मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। चार बार परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने रणनीति बदली और पांचवें प्रयास में UPSC पास कर IPS बनने का सपना पूरा किया।

IIM से MBA के बाद छोड़ी कॉरपोरेट नौकरी

विक्रम दहिया की सफलता की कहानी किसी आसान सफर की कहानी नहीं है। IIM से MBA करने के बाद उन्होंने लंदन की एक फर्म में नौकरी शुरू की थी। करियर अच्छा चल रहा था और आर्थिक स्थिति भी ठीक थी। इसके बावजूद उनके मन में समाज के लिए कुछ अलग करने और बदलाव लाने की इच्छा थी।

इसी सोच के चलते उन्होंने कॉरपोरेट करियर छोड़कर UPSC Civil Services Examination की तैयारी करने का फैसला किया। इसके बाद उनकी जिंदगी का एक ऐसा दौर शुरू हुआ, जिसमें उन्हें लगातार कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

दिल्ली में खत्म हुई सेविंग्स, बैंक बैलेंस हुआ जीरो

UPSC की तैयारी के लिए विक्रम दिल्ली पहुंचे। राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर में रहकर उन्होंने परीक्षा की तैयारी की। शुरुआत में उनके पास अपनी सेविंग्स थीं, लेकिन लंबे समय तक नौकरी से दूर रहने और तैयारी में होने वाले खर्च के कारण धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती गई।

एक समय ऐसा आया जब उनकी सेविंग्स खत्म हो गईं और बैंक बैलेंस भी जीरो हो गया। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने दोबारा प्राइवेट नौकरी पाने की कोशिश की। कई जगह इंटरव्यू दिए, लेकिन सफलता नहीं मिली।

इस दौर में उन्हें आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े। लगातार असफलताओं और आर्थिक संकट का असर उनके आत्मविश्वास पर पड़ा। उन्हें लगने लगा था कि शायद वह UPSC जैसी कठिन परीक्षा के लिए योग्य नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी पूरी तरह छोड़ने का फैसला नहीं किया।

मां की मौत ने तोड़ दिया, डिप्रेशन से भी गुजरे

विक्रम के जीवन में सबसे कठिन समय तब आया जब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार थीं। 1 अक्टूबर 2018 को उनकी मां का निधन हो गया। यह उनके लिए बेहद बड़ा व्यक्तिगत नुकसान था।

मां को खोने के बाद उनका मानसिक संघर्ष और बढ़ गया। जिस मां के सपने को पूरा करने के लिए वह अधिकारी बनने की कोशिश कर रहे थे, वही उनके साथ नहीं थीं। पारिवारिक परिस्थितियों और इस गहरे सदमे ने उन्हें डिप्रेशन की स्थिति तक पहुंचा दिया।

इस समय उनके लिए पढ़ाई पर ध्यान लगाना आसान नहीं था। आर्थिक परेशानियां, लगातार असफलताएं और मां को खोने का दुख एक साथ उनके सामने था। फिर भी उन्होंने अपने सपने को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया।

मुंबई की नौकरी से फिर दिल्ली तक, बदली तैयारी की रणनीति

मां के निधन के बाद विक्रम ने खुद को संभालने की कोशिश की। उन्होंने मुंबई में नौकरी भी की, लेकिन UPSC का लक्ष्य नहीं छोड़ा। कुछ समय बाद उन्होंने फिर दिल्ली लौटकर परीक्षा की तैयारी शुरू करने का निर्णय लिया।

इस बार उन्होंने अपनी पिछली गलतियों पर ध्यान दिया और तैयारी की रणनीति में बदलाव किया। सिर्फ मेहनत करने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को पहचानकर तैयारी को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।

उन्होंने अपनी ऊर्जा दोबारा पढ़ाई पर लगाई और लगातार प्रयास जारी रखा। उनके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने का लक्ष्य नहीं था, बल्कि लंबे संघर्ष के बाद अपने सपने को पूरा करने की कोशिश थी।

चार असफलताओं के बाद पांचवें प्रयास में मिली सफलता

विक्रम दहिया को UPSC में लगातार चार बार असफलता मिली। चार प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार पांचवें प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई।

वर्ष 2020 में उन्होंने UPSC Civil Services Examination पास की और IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। इस सफलता के साथ उनके संघर्ष का लंबा दौर भी खत्म हुआ।

उनकी कहानी बताती है कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होती। लंबे समय तक तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के सामने आर्थिक, व्यक्तिगत और मानसिक चुनौतियां भी आ सकती हैं। विक्रम दहिया ने इन परिस्थितियों के बीच अपनी तैयारी जारी रखी और कई असफलताओं के बाद अपने लक्ष्य तक पहुंचे। आज उनकी यात्रा उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण है, जो लगातार प्रयास के बावजूद सफलता का इंतजार कर रहे हैं।

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