कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव के बाद महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला है। आमतौर पर विरोधी दल माने जाने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इस बार शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया।
मुंबई: कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में निकाय चुनाव के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। आमतौर पर एक-दूसरे के विरोधी माने जाने वाले दल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इस बार शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया है। यह कदम नगर निगम में सत्ता गठन को लेकर अहम माना जा रहा है और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
MNS के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने पार्टी के पांचों नगरसेवकों की ओर से शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शहर के विकास और कल्याण को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं, इससे पहले शिवसेना के सभी 53 नगरसेवक नवी मुंबई में स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपने गुट का औपचारिक पंजीकरण कराया। यह राजनीतिक साझेदारी और समर्थन शहर में सरकार बनाने की प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा देगा।
MNS ने शिंदे शिवसेना को दिया समर्थन
एमएनएस के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने पांचों नगरसेवकों की ओर से शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय शहर के विकास और जनता की भलाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस कदम के बाद शिवसेना के 53 और MNS के 5 पार्षदों का सहयोग मिलकर संख्या 58 तक पहुंच गई, जो नगर निगम में सत्ता गठन के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे पहले, शिंदे गुट के 53 शिवसेना नगरसेवकों ने नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय में अपना औपचारिक पंजीकरण कराया। एमएनएस के पांच नगरसेवक भी उसी दौरान वहां पहुंचे और समर्थन देने की प्रक्रिया पूरी की।

उद्धव गुट को राजनीतिक झटका
सूत्रों की मानें तो उद्धव ठाकरे गुट के 11 में से कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट की शिवसेना के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यह कदम उद्धव गुट के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, “MNS ने शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए समर्थन दिया है। यह गठबंधन सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि नगर निगम के विकास को ध्यान में रखकर किया गया है।”
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत नगर निगम चुनाव में साथ लड़ा था। मेयर पद के लिए अब अंतिम फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण मिलकर करेंगे। भाजपा की ओर से मेयर पद को लेकर ढाई-ढाई साल का कार्यकाल लागू करने की मांग की गई है।
यानी पहले ढाई साल मेयर भाजपा का होगा और अगले ढाई साल में शिवसेना का। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फॉर्मूला दोनों पार्टियों के बीच संतुलन बनाए रखने और गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति है।
केडीएमसी की सत्ता में संभावित समीकरण
122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में इस समय किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। शिवसेना के 53 और MNS के 5 पार्षदों के समर्थन से गठबंधन की संख्या 58 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, भाजपा के साथ मिलकर महायुति का मेयर पद पर कब्जा लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मेयर पद और निगम में सत्ता का समीकरण पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। साथ ही, यह गठबंधन भविष्य में नगर निगम के विकास कार्यों और नीतियों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।










