पूर्व कानून मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारत निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बार विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग आ गया है, जिस पर पूर्व कानून मंत्री और राज्यसभा सांसद Kapil Sibal ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सिब्बल ने दावा किया है कि राज्य में मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इसे उन्होंने “मताधिकार छीनने का प्रयोग” बताया है।
चुनाव आयोग पर निष्पक्षता को लेकर सवाल
सिब्बल ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पर निशाना साधते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर चिंता उत्पन्न हो रही है और उसकी प्रक्रियाएं पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रही हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मतदाताओं के अधिकारों को इस तरह सीमित किया जाना है, तो फिर चुनाव कराने का उद्देश्य ही क्या रह जाता है।
कपिल सिब्बल का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने और मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर असामान्य तरीके अपनाए जा रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रक्रियाओं का उपयोग करके मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

वोटर लिस्ट प्रक्रिया पर विवाद
सिब्बल के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा एक नया मानदंड अपनाया जा रहा है, जिसके तहत यदि किसी मतदाता और उसके पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से अधिक का अंतर पाया जाता है, तो नाम सूची से हटाया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को “तर्कहीन और गलत” बताया और कहा कि इससे वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों जैसे Maharashtra और Haryana में हुए चुनावों में ऐसी व्यवस्था नहीं देखी गई थी, जैसी बंगाल में लागू की जा रही है। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था का उपयोग राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
कपिल सिब्बल ने इससे पहले भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और वह सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रहा, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।












