उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अलीगढ़ में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब अपने नाम पर वोट मांगने से बच रही है और पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक यानी पीडीए के नाम पर राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। पाठक ने सपा की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के नाम पर मिठाई खराब हो गई है, इसलिए अब पीडीए की आड़ ली जा रही है। उनके बयान के केंद्र में आगामी चुनाव, सपा की राजनीतिक रणनीति और दोनों दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप रहे।
अलीगढ़ के डीएस डिग्री कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में पहुंचे उपमुख्यमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए आगामी राजनीतिक गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव को महत्वपूर्ण बताया। पाठक के अनुसार, एमएलसी चुनाव को आने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारी के लिहाज से देखा जा रहा है। उन्होंने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल नाम और पहचान के आधार पर समर्थन मांगने के बजाय पीडीए जैसे राजनीतिक फॉर्मूले का इस्तेमाल कर रही है।
ब्रजेश पाठक ने सपा के पिछले शासनकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान जमीनों पर कब्जे और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं। सपा सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी का नारा था, “जो हो खाली प्लाट, वह हमारा।” यह टिप्पणी उन्होंने सपा के शासनकाल को लेकर अपने राजनीतिक आरोपों के संदर्भ में की। ये आरोप भाजपा और सपा के बीच लंबे समय से चल रही राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं।
पीडीए समाजवादी पार्टी की उस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एक साझा सामाजिक-राजनीतिक समूह के रूप में जोड़ने की बात कही जाती है। अखिलेश यादव इस अवधारणा को अपनी पार्टी की राजनीति में प्रमुखता देते रहे हैं। वहीं, भाजपा नेता इस फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए सपा पर जाति और समुदाय के आधार पर समर्थन जुटाने का आरोप लगाते हैं। ब्रजेश पाठक का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक बहस से जुड़ा है।
अलीगढ़ में शिक्षक सम्मेलन के दौरान एमएलसी चुनाव का जिक्र करना भी महत्वपूर्ण रहा। उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से होने वाले विधान परिषद चुनावों में शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं की भूमिका रहती है। ऐसे चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अपने संगठन, समर्थकों और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ का आकलन करने का अवसर भी बनते हैं। पाठक ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम राजनीतिक मुकाबले के रूप में पेश किया। हालांकि, चुनाव के नतीजों को लेकर कोई निष्कर्ष पहले से नहीं निकाला जा सकता।
ब्रजेश पाठक के बयान से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं। भाजपा जहां सपा के शासनकाल और पीडीए की राजनीति पर सवाल उठा रही है, वहीं सपा अपने सामाजिक गठजोड़ और राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाती रही है। इन बयानों के बीच मतदाताओं के लिए दोनों दलों के दावों, नीतियों और उनके कामकाज को तथ्यों के आधार पर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।










