प्रस्तावित सैलून अलीगढ़ और टूंडला रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में खोले जाएंगे। यह वह हिस्सा होता है जहां यात्रियों के आने-जाने, वाहनों के रुकने और स्टेशन में प्रवेश करने की व्यवस्था रहती है। रेलवे यहां व्यवस्थित सैलून स्थापित करने की तैयारी कर रहा है, जहां यात्रियों को आरामदायक कुर्सियों और ग्रूमिंग से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इस व्यवस्था के शुरू होने से ट्रेन पकड़ने से पहले या ट्रेन के इंतजार के दौरान यात्री अपनी जरूरत के अनुसार सैलून सेवाएं ले सकेंगे।
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा खास तौर पर उपयोगी हो सकती है। कई बार लोगों को अचानक किसी जरूरी बैठक, शादी-समारोह या अन्य कार्यक्रम में पहुंचना होता है, लेकिन व्यस्तता के कारण वे घर से निकलने से पहले सैलून नहीं जा पाते। ऐसे में स्टेशन पर उपलब्ध ग्रूमिंग सुविधा उनके लिए मददगार साबित हो सकती है। यात्री ट्रेन के समय के अनुसार उपलब्ध खाली वक्त का इस्तेमाल बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने या दूसरी उपलब्ध सेवाएं लेने के लिए कर सकेंगे। हालांकि, सेवाओं की वास्तविक सूची और उनके शुल्क की जानकारी सैलून संचालन शुरू होने पर स्पष्ट होगी।
रेलवे के इस फैसले में महिला यात्रियों को भी ध्यान में रखा गया है। यूनिसेक्स सैलून का मतलब ऐसी सैलून सुविधा से है, जहां महिला और पुरुष दोनों ग्राहकों को सेवाएं दी जा सकती हैं। इससे स्टेशन पर यात्रियों को एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और उन्हें केवल सैलून से जुड़ी जरूरतों के लिए बाहर जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है। खासकर उन यात्रियों को इससे सुविधा होगी, जिनकी ट्रेन आने में अभी समय है और वे स्टेशन परिसर में रहते हुए ही अपनी साज-सज्जा से जुड़ा काम पूरा करना चाहते हैं।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इन सैलून की स्थापना, संचालन और प्रबंधन के लिए पांच वर्ष की अवधि का ठेका दिया जाएगा। इसके लिए 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे ई-नीलामी आयोजित करने की योजना है। इच्छुक संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भाग लेना होगा। ठेका मिलने के बाद सैलून स्थापित करने और सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसलिए फिलहाल यह सुविधा शुरू करने की तैयारी है, यात्रियों को इसके संचालन की शुरुआत के लिए इंतजार करना होगा। रेलवे को उम्मीद है कि इस पहल से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ-साथ गैर-किराया राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। स्टेशन परिसर में व्यावसायिक सेवाओं के लिए जगह उपलब्ध कराने से रेलवे को लाइसेंस शुल्क के रूप में आय प्राप्त हो सकती है। वहीं, सैलून का संचालन करने वाले लोगों के लिए भी व्यवसाय का अवसर तैयार होगा। यदि अलीगढ़ और टूंडला में यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में दूसरे स्टेशनों पर भी इस तरह की सुविधा शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अन्य स्टेशनों पर विस्तार को लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।
रेलवे स्टेशनों पर अब तक यात्रियों की जरूरतों के लिए खानपान, प्रतीक्षालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा है। यूनिसेक्स सैलून की पहल इस व्यवस्था में एक नया विकल्प जोड़ सकती है। इससे उन यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें सफर के दौरान तैयार होने या किसी खास कार्यक्रम में पहुंचने से पहले साज-सज्जा की जरूरत होती है। अलीगढ़ और टूंडला से शुरू होने वाली यह योजना कितनी सफल रहती है, यह इसके संचालन, सेवाओं की गुणवत्ता, शुल्क और यात्रियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।









