ब्रह्मोस, आकाश और नेत्र सिस्टम की वैश्विक मांग बढ़ी: भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 38,000 करोड़ रुपये के पार

भारत के रक्षा उत्पाद BrahMos Missile System, Akash Missile System और Netra Airborne Early Warning System की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते भारत

भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हाल ही में स्वदेशी हथियार प्रणालियों—जैसे BrahMos missile, Akash missile system, लॉइटरिंग म्यूनिशन और ‘नेत्र’ जैसे सिस्टम के प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

नई दिल्ली: भारतीय रक्षा उद्योग तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों—ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, पिनाका रॉकेट सिस्टम और लॉयटरिंग म्यूनिशन जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म्स—की बढ़ती मांग ने भारत को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक उभरती महाशक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।

रक्षा मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 62% की वृद्धि दर्शाता है। सरकार ने 2029-30 तक इस आंकड़े को बढ़ाकर ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

ब्रह्मोस मिसाइल: वैश्विक खरीदारों की पहली पसंद

भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस अब अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में सबसे अधिक मांग वाले हथियारों में शामिल हो गई है। फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया सहित कई देशों ने इस प्रणाली में गहरी रुचि दिखाई है। फिलीपींस के साथ लगभग ₹3,200 करोड़ का सौदा पहले ही पूरा हो चुका है. वियतनाम के साथ करीब ₹5,800 करोड़ की डील पर सहमति बन चुकी है।

इंडोनेशिया के साथ लगभग ₹3,600 करोड़ का समझौता अंतिम चरण में है. कुल मिलाकर ब्रह्मोस सिस्टम से जुड़े रक्षा सौदे ₹12,500 करोड़ से अधिक के हो चुके हैं या प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से भी बातचीत जारी है।

आकाश-1एस और आकाश-एनजी सिस्टम की मांग बढ़ी

ब्रह्मोस, आकाश और नेत्र सिस्टम की वैश्विक मांग बढ़ी: भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 38,000 करोड़ रुपये के पार

भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आकाश मिसाइल सिस्टम ने भी वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभावशीलता साबित की है। आर्मेनिया के साथ करीब ₹6,100 करोड़ का अनुबंध पहले ही लागू किया जा चुका है और इसकी डिलीवरी जारी है। हाल ही में आर्मेनिया की सैन्य परेड में इस सिस्टम की मौजूदगी ने इसकी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को और मजबूत किया है। 

इसके अलावा, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने आकाश-1एस में रुचि दिखाई है. नई पीढ़ी के आकाश-एनजी सिस्टम को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है

पिनाका रॉकेट सिस्टम की वैश्विक पहचान

भारतीय मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पिनाका अब कई देशों की रणनीतिक जरूरतों का हिस्सा बनता जा रहा है। आर्मेनिया ने इसे अपनी सेना में शामिल किया है, जहां इसे “शांत” नाम दिया गया है. गाइडेड पिनाका की मारक क्षमता लगभग 75 किलोमीटर तक है. फ्रांस सहित कुछ यूरोपीय देशों से संभावित खरीद की चर्चाएं सामने आई हैं।

लॉयटरिंग म्यूनिशन और ‘नेत्र’ सिस्टम की बढ़ती मांग

भारतीय लॉयटरिंग म्यूनिशन सिस्टम (नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर) की वैश्विक मांग में भी तेज़ी आई है। साइप्रस ने 2026-31 रक्षा रोडमैप में इसे शामिल करने की योजना जताई है. दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व से लगातार पूछताछ हो रही है. इन प्रणालियों की बढ़ती मांग को देखते हुए HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और निजी क्षेत्र की अदानी डिफेंस जैसी कंपनियां उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ा रही हैं।

भारत 100 से अधिक देशों को कर रहा है रक्षा निर्यात

भारत अब दुनिया के 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया प्रमुख साझेदार हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अमेरिका भारत के रक्षा निर्यात का एक बड़ा ग्राहक बनकर उभरा है, जहां भारतीय रक्षा उत्पाद और तकनीक लगभग $2.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। भारत के रक्षा निर्यात में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।

  • 2016-17 में रक्षा निर्यात: ₹1,522 करोड़
  • 2025-26 में बढ़कर: ₹38,424 करोड़

यह लगभग 25 गुना वृद्धि को दर्शाता है, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वास को रेखांकित करता है।

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