BRICS देशों में अलग-अलग रुख, पश्चिम एशिया संकट पर संयुक्त बयान अटका, जानिए पूरा मामला

पश्चिम एशिया संकट पर BRICS देशों के बीच साझा बयान बनाना मुश्किल हो गया है। भारत अध्यक्ष के रूप में सदस्य देशों से बातचीत कर रहा है, लेकिन मतभेदों के कारण।

पश्चिम एशिया संकट को लेकर BRICS देशों के बीच साझा बयान पर सहमति बनाना मुश्किल हो गया है। भारत अध्यक्ष के रूप में बातचीत कर रहा है, लेकिन सदस्य देशों के अलग-अलग रुख के कारण अभी तक संयुक्त राय तैयार नहीं हो सकी।

BRICS 2026: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS देशों के भीतर एक साझा बयान पर सहमति बनाना आसान नहीं हो पा रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर सभी सदस्य देशों के साथ बातचीत कर एक संयुक्त रुख तैयार करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक आम राय नहीं बन पाई है। दरअसल समस्या यह है कि इस संघर्ष में शामिल कई देश खुद BRICS समूह का हिस्सा हैं, जिसके कारण समूह के भीतर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए समूह की ओर से किसी भी तरह का संयुक्त बयान तैयार करना उसकी जिम्मेदारी भी है। हालांकि सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बन गई है।

विदेश मंत्रालय ने बताई स्थिति

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए कहा कि BRICS के भीतर पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं, इसलिए सभी देशों की सहमति से एक साझा बयान तैयार करना आसान नहीं है।

जायसवाल ने किसी भी देश का नाम लिए बिना कहा कि अलग-अलग देशों के दृष्टिकोण अलग हैं और यही कारण है कि अभी तक समूह के भीतर आम सहमति नहीं बन पाई है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत लगातार सदस्य देशों के साथ संपर्क में है और बातचीत के माध्यम से एक संयुक्त रुख तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

शेरपा चैनल के जरिए चल रही बातचीत

BRICS देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए भारत ‘शेरपा चैनल’ के माध्यम से बातचीत कर रहा है। शेरपा स्तर की बैठकें आमतौर पर बड़े अंतरराष्ट्रीय समूहों में नीति से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए आयोजित की जाती हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार 12 मार्च को BRICS देशों के शेरपा प्रतिनिधियों की एक बैठक डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की गई और सदस्य देशों के विचारों को समझने की कोशिश की गई।

हालांकि इस बैठक में भी सभी देशों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन सकी। इसके बावजूद भारत बातचीत की प्रक्रिया को जारी रखे हुए है ताकि भविष्य में किसी साझा बयान पर सहमति बन सके।

भारत के सामने क्यों बड़ी चुनौती

BRICS देशों में अलग-अलग रुख, पश्चिम एशिया संकट पर संयुक्त बयान अटका, जानिए पूरा मामला

BRICS की वर्तमान अध्यक्षता भारत के पास है, इसलिए समूह की ओर से किसी भी आधिकारिक बयान को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी भी भारत पर ही है। लेकिन यह स्थिति इसलिए जटिल हो गई है क्योंकि BRICS के कुछ सदस्य देश खुद पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट में शामिल हैं।

BRICS समूह में शामिल Iran, United Arab Emirates और Saudi Arabia जैसे देश इस क्षेत्रीय तनाव से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन देशों के हित और दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं।

इस वजह से भारत के लिए ऐसा बयान तैयार करना चुनौती बन गया है जो सभी सदस्य देशों को स्वीकार्य हो। किसी एक पक्ष का समर्थन करने वाला बयान देने से समूह के भीतर असहमति और बढ़ सकती है।

ईरान ने BRICS से एकजुटता की अपील की

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने BRICS देशों से एकजुटता दिखाने की अपील भी की है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच फोन पर बातचीत हुई।

यह बातचीत उस समय हुई जब क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद यह उनकी चौथी बातचीत थी।

ईरान की ओर से इस दौरान BRICS देशों से अपील की गई कि वे क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति को लेकर एकजुट रुख अपनाएं। हालांकि इस मुद्दे पर सभी सदस्य देशों की राय एक जैसी नहीं है, इसलिए समूह के भीतर सहमति बनाने की प्रक्रिया अभी जारी है।

BRICS समूह का बढ़ता प्रभाव

BRICS दुनिया के प्रमुख उभरते आर्थिक और राजनीतिक समूहों में से एक बन चुका है। शुरुआत में इस समूह में पांच देश शामिल थे, जिनमें Brazil, Russia, India, China और South Africa शामिल थे।

बाद में इस समूह का विस्तार किया गया और नए देशों को इसमें शामिल किया गया। 2024 में इस समूह में Egypt, Ethiopia, Iran और United Arab Emirates को शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में Indonesia भी इस समूह का हिस्सा बन गया।

इस तरह अब BRICS में कुल 11 देश शामिल हैं और यह समूह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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