ब्रिटेन में रक्षा फंडिंग को लेकर सरकार संकट में घिर गई है। रक्षा सचिव जॉन हीली के बाद सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने भी इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं ने सैन्य निवेश योजना को अपर्याप्त बताते हुए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना की।
लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब रक्षा बजट और सैन्य निवेश को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच रक्षा सचिव जॉन हीली और सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की प्रस्तावित रक्षा निवेश योजना (Defence Investment Plan) पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए कहा कि मौजूदा फंडिंग स्तर देश की सुरक्षा जरूरतों और भविष्य की सैन्य चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं है।
इन इस्तीफों ने ब्रिटिश सरकार के भीतर बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है और प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अल कार्न्स ने फंडिंग को बताया अपर्याप्त
सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने अपने इस्तीफे में कहा कि सरकार की रक्षा निवेश योजना न तो पर्याप्त रूप से महत्वाकांक्षी है और न ही उसे वह वित्तीय समर्थन मिल रहा है जिसकी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी योजना का समर्थन नहीं कर सकते जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न कराए।
कार्न्स ने स्पष्ट किया कि उनका मानना है कि ब्रिटेन को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए अधिक निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बजट देश की सैन्य तैयारियों को अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा पाएगा।
जॉन हीली ने भी उठाए गंभीर सवाल
रक्षा सचिव जॉन हीली ने अपने इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में रक्षा खर्च को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित सैन्य बजट बढ़ते वैश्विक खतरों के मुकाबले काफी कम है और इससे ब्रिटेन की सुरक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
हीली ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि रक्षा निवेश योजना में अधिकांश अतिरिक्त फंडिंग भविष्य के वर्षों के लिए निर्धारित की गई है, जबकि सेना को तत्काल संसाधनों की आवश्यकता है। उनके अनुसार आने वाले दो वर्ष ब्रिटेन की सैन्य तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सरकार के भीतर बढ़ता असंतोष
रक्षा मंत्रालय के दो वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे ने यह संकेत दिया है कि रक्षा खर्च को लेकर सरकार के भीतर लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। इन इस्तीफों के बाद रक्षा मंत्रालय में संसदीय सहायक की भूमिका निभाने वाली सांसद पामेला नैश ने भी अपना पद छोड़ दिया।
नैश ने कहा कि रक्षा निवेश योजना के लिए आवश्यक धनराशि सुनिश्चित करने में हो रही देरी और अनिश्चितता जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन इस्तीफों ने सरकार की एकजुटता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
डैन जार्विस को मिली नई जिम्मेदारी
सरकार ने संकट को संभालने के लिए सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस को नया रक्षा सचिव नियुक्त किया है। जार्विस पूर्व सैन्य अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें रक्षा मामलों का व्यापक अनुभव है।
हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उस रक्षा निवेश योजना को अंतिम रूप देना होगी जिसे लेकर सरकार के भीतर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्हें रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच संतुलन बनाते हुए नई रणनीति तैयार करनी होगी।

नाटो शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ा दबाव
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अगले महीने नाटो का महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है। ब्रिटिश सरकार इस सम्मेलन से पहले अपनी नई रक्षा निवेश योजना की घोषणा करना चाहती थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोप की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच नाटो सदस्य देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ब्रिटेन की रक्षा नीति को लेकर उठे सवाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच मतभेद
सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने आने वाले वर्षों के लिए लगभग 28 अरब पाउंड की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की थी। हालांकि सरकार की ओर से प्रस्तावित पैकेज इससे काफी कम बताया जा रहा है।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए अतिरिक्त निवेश आवश्यक है। नई तकनीक, उन्नत हथियार प्रणाली, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और नौसैनिक क्षमताओं के विकास के लिए भारी बजट की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि रक्षा मंत्रालय लंबे समय से अधिक फंडिंग की मांग कर रहा था।
रणनीतिक रक्षा समीक्षा की सिफारिशें
पिछले वर्ष जारी रणनीतिक रक्षा समीक्षा में ब्रिटेन को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने और युद्ध तैयारी की दिशा में तेजी से कदम उठाने की सलाह दी गई थी। रिपोर्ट में अतिरिक्त गोला-बारूद भंडारण, उन्नत लड़ाकू विमान, आधुनिक ड्रोन, नई पनडुब्बियों और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों में निवेश बढ़ाने की सिफारिश की गई थी।
रक्षा निवेश योजना का उद्देश्य इन सिफारिशों को लागू करने के लिए वित्तीय रोडमैप तैयार करना था, लेकिन फंडिंग विवाद के कारण योजना को अंतिम रूप देने में देरी होती रही।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने इस्तीफों को सरकार की नीतिगत विफलता करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि यदि रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ नेता स्वयं बजट को अपर्याप्त मान रहे हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कंजर्वेटिव नेताओं ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि वह बढ़ती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच ब्रिटेन की रक्षा तैयारियों को कैसे मजबूत बनाएगी।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने किया बचाव
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित योजना सेना को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी और रक्षा उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगी।स्टार्मर ने यह भी कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहती है और वह ऐसे फैसले नहीं लेना चाहती जो भविष्य में आर्थिक अस्थिरता पैदा करें।
ब्रिटेन की राजनीति के लिए अहम मोड़
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा बजट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले महीनों में ब्रिटिश राजनीति की दिशा तय कर सकता है। लगातार हो रहे इस्तीफों और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
रक्षा सचिव जॉन हीली और सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स के इस्तीफे केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं माने जा रहे, बल्कि इन्हें सरकार की रक्षा नीति और नेतृत्व क्षमता पर अविश्वास के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।











