यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान गूगल मैप्स की गलत लोकेशन के कारण 300 से अधिक अभ्यर्थी मुजफ्फरनगर की बजाय शामली के एक नलकूप पर पहुंच गए। कई अभ्यर्थियों को ग्रामीणों ने मदद पहुंचाई, लेकिन 50 से अधिक परीक्षार्थी समय पर केंद्र नहीं पहुंच सके।
Shamli: तकनीक पर भरोसा कर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने निकले यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के सैकड़ों अभ्यर्थियों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब गूगल मैप्स ने उन्हें गलत लोकेशन पर पहुंचा दिया। मुजफ्फरनगर स्थित परीक्षा केंद्र की जगह अभ्यर्थी शामली जिले के एक खेत में बने नलकूप तक पहुंच गए, जिससे कई उम्मीदवारों की परीक्षा भी छूट गई।
गूगल मैप्स की गलत लोकेशन से बढ़ी अभ्यर्थियों की परेशानी

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए तकनीक पर भरोसा करना भारी पड़ गया। गूगल मैप्स पर दिखाई गई गलत लोकेशन के कारण तीन दिनों के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थी अपने वास्तविक परीक्षा केंद्र की बजाय शामली जिले के चौंदाहेड़ी गांव स्थित एक खेत और नलकूप तक पहुंच गए। परीक्षा केंद्र मुजफ्फरनगर में निर्धारित था, लेकिन डिजिटल मैपिंग की त्रुटि ने उम्मीदवारों को करीब 59 किलोमीटर दूर भटका दिया। इस घटना के चलते कई अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव और समय की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुजफ्फरनगर की जगह शामली पहुंच गए उम्मीदवार
जानकारी के अनुसार सभी अभ्यर्थियों का परीक्षा केंद्र मुजफ्फरनगर स्थित दीपचंद ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज में बनाया गया था। अधिकांश परीक्षार्थी दूसरे जिलों से आए थे और स्थानीय क्षेत्र से परिचित नहीं थे। समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए उन्होंने गूगल मैप्स का सहारा लिया। मैप पर कॉलेज का नाम खोजने पर जो लोकेशन दिखाई गई, वह वास्तविक केंद्र न होकर शामली जिले के चौंदाहेड़ी गांव के पास स्थित एक निजी ट्यूबवेल और खेत का स्थान था। मैप के निर्देशों का पालन करते हुए अभ्यर्थी लगातार उसी दिशा में पहुंचते रहे।
खेत और नलकूप देखकर हैरान रह गए परीक्षार्थी
जब अभ्यर्थी बताए गए स्थान पर पहुंचे तो वहां परीक्षा केंद्र की जगह खेत और एक नलकूप दिखाई दिया। कई उम्मीदवारों को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि वे गलत स्थान पर पहुंच चुके हैं। स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर उन्हें पता चला कि जिस लोकेशन को परीक्षा केंद्र बताया जा रहा है, वह वास्तव में किसी शैक्षणिक संस्थान का पता नहीं है। इससे अभ्यर्थियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और वे समय रहते सही केंद्र तक पहुंचने के लिए संघर्ष करने लगे।
ग्रामीणों ने की मदद, फिर भी कई की परीक्षा छूटी
स्थानीय ग्रामीणों ने स्थिति को समझते हुए अभ्यर्थियों की मदद की। ग्रामीणों ने उन्हें सही परीक्षा केंद्र का रास्ता बताया और कई मामलों में निजी वाहनों की व्यवस्था कर उन्हें मुजफ्फरनगर तक पहुंचाने का प्रयास भी किया। इसके बावजूद समय की कमी के कारण 50 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई। तीन दिनों तक लगातार उम्मीदवारों के चौंदाहेड़ी गांव पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
डिजिटल मैपिंग की सटीकता पर उठे सवाल
इस घटना के बाद डिजिटल नेविगेशन सेवाओं की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी भर्ती और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन मैपिंग सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में गलत लोकेशन से न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार करियर और भविष्य से जुड़े अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित एजेंसियां ऐसी त्रुटियों को जल्द सुधारें ताकि भविष्य में किसी अन्य उम्मीदवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।











