Budget Session 2026: लोकसभा में राष्ट्रपति भाषण पर 18 घंटे बहस, विपक्ष उठाएगा प्रमुख मुद्दे, जानें PM कब देंगे जवाब

Budget Session 2026 में राष्ट्रपति अभिभाषण पर 18 घंटे बहस होगी। PM Modi 4 फरवरी को जवाब देंगे। इसके बाद केंद्रीय बजट 2026-27 पर गहन चर्चा शुरू होगी।

संसद के Budget Session 2026 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर 18 घंटे बहस होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी को उत्तर देंगे। इसके बाद केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा शुरू होगी, जिसमें आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित होगा।

Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर 18 घंटे की बहस तय की गई है। यह बहस लोकसभा में 2, 3 और 4 फरवरी को होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देंगे। इस बहस के बाद केंद्रीय बजट 2026-27 पर विस्तृत चर्चा शुरू होगी, जो सत्र की प्रमुख वित्तीय और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होगी।

लोकसभा की कार्यवाही

सरकार ने बजट सत्र के दौरान संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 18 घंटे आवंटित किए हैं। यह निर्णय गुरुवार को लोकसभा की कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी का यह उत्तर बजट सत्र की शुरुआत में वित्तीय और राजनीतिक मुद्दों पर दिशा तय करेगा। चर्चा में सांसदों को राष्ट्रपति के भाषण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा

लोकसभा में 2026-27 के केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा 5, 9, 10 और 11 फरवरी को होगी। इस चर्चा के लिए कुल 18 घंटे निर्धारित हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 फरवरी को बजट पर जवाब देंगी। इस चर्चा में आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं, कर प्रणाली, रोजगार और सामाजिक योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन बहस होगी।

क्या रहे विपक्ष के मुद्दे

मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार से कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की। इसमें एमजीएनआरईजीए की बहाली, मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और UGC विवाद जैसे मुद्दे शामिल थे। विपक्ष ने बजट सत्र में इन मामलों पर विचार करने और सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

लोकसभा की अगली बैठक

लोकसभा गुरुवार दोपहर को स्थगित कर दी गई और 1 फरवरी को सुबह 11:00 बजे फिर से बैठक होगी। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करेंगी। यह सर्वेक्षण केंद्रीय बजट पेश करने के लिए मंच तैयार करेगा।

आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व

वित्त मंत्री सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवें वर्ष केंद्रीय बजट पेश करेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण, बजट से पहले पेश किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत विवरण देता है। यह रिपोर्ट पिछले वित्त वर्ष के आर्थिक प्रदर्शन की समीक्षा करती है और आगामी राजकोषीय योजनाओं के लिए नीति दिशा निर्देश प्रस्तुत करती है।

आर्थिक सर्वेक्षण भारत की अर्थव्यवस्था का आधिकारिक वार्षिक "रिपोर्ट कार्ड" माना जाता है। इसमें सकल घरेलू उत्पाद (GDP), निवेश, निर्यात, रोजगार, महंगाई और वित्तीय स्थिरता से जुड़े आंकड़ों पर विस्तृत विश्लेषण होता है। इसके माध्यम से सरकार नीतिगत सुधारों और विकास योजनाओं की रूपरेखा तय करती है।

सर्वेक्षण और बजट का आपसी संबंध

आर्थिक सर्वेक्षण बजट पेश करने से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति और प्रमुख आर्थिक संकेतकों को रेखांकित करता है। यह सरकार को अपने राजकोषीय फैसलों को आकार देने और संसदीय बहस में व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने में मदद करता है। बजट सत्र में इस सर्वेक्षण का विश्लेषण सांसदों और नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक के रूप में काम करता है।

बजट सत्र की प्रमुख गतिविधियां

बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद वित्तीय और सामाजिक नीतियों पर चर्चा, केंद्रीय बजट पेश करना, उसके विभिन्न खंडों पर बहस और उत्तर देने की प्रक्रिया शामिल होती है। यह सत्र नीति निर्धारण और संसदीय निगरानी का प्रमुख माध्यम है। सांसदों को वित्तीय योजना, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर अपने विचार रखने का अवसर मिलता है।

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