झांसी के गंगावली में ₹19.1 करोड़ की लागत से आधुनिक जल प्रबंधन और खेती का पायलट प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। सफल मॉडल को पाहुज नहर क्षेत्र के 24 अन्य गांवों में लागू किया जाएगा।
लखनऊ: बुंदेलखंड के जल संकट से निपटने और किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए 'इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट' के तहत झांसी के गंगावली में ₹19.1 करोड़ का मिनी पायलट प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है। इसमें जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन और सिंचाई ऑटोमेशन को एक साथ जोड़ा गया है। मॉडल को आगे 24 गांवों तक विस्तार देने की योजना है।
गंगावली में तैयार हो रहा आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल
बुंदेलखंड में पानी की समस्या के स्थायी समाधान और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आधुनिक जल प्रबंधन आधारित खेती का मॉडल तैयार किया जा रहा है। 'इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट' के तहत झांसी के बड़ागांव विकासखंड के गंगावली गांव में ₹19.1 करोड़ की लागत से मिनी पायलट प्रोजेक्ट विकसित हो रहा है।
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इस परियोजना में सीमित जल संसाधनों का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग करने पर जोर दिया गया है। योजना के तहत जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और माइक्रो इरिगेशन को एक ही सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को कम पानी में बेहतर और आधुनिक तरीके से खेती करने का व्यावहारिक मॉडल उपलब्ध कराना है।
जलाशय और सोलर पंप का काम पूरा
गंगावली में परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा सोलर पंप स्थापित किया गया है और नहर से जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए इंटेक पाइप भी लगाया गया है।
गांव के गंदे पानी को जलाशय में पहुंचने से रोकने के लिए Natural STP तैयार किया गया है। इसके जरिए पानी को साफ करने और जलाशय को प्रदूषण से बचाने की व्यवस्था की गई है।
परियोजना के तहत PUF पैनल आधारित भवनों का निर्माण भी पूरा हो चुका है। परिसर की सुरक्षा और निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
8.5 हेक्टेयर में होगा आधुनिक खेती का लाइव डेमो
परियोजना के अगले चरण में 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीकों का लाइव डेमो तैयार किया जाएगा। इस क्षेत्र में किसानों को नई सिंचाई तकनीक और वैज्ञानिक खेती के तरीके व्यवहारिक रूप से दिखाए जाएंगे।
यहां ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ग्रीनहाउस और सिंचाई ऑटोमेशन के लिए SCADA व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
इस मॉडल के जरिए किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार सटीक मात्रा में पानी देने की तकनीक समझाई जाएगी। इससे पानी की बचत के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
72 ट्रेनिंग सेशन में किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
परियोजना में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बजाय किसानों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत कुल 72 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे।
प्रत्येक सेशन में करीब 100 किसानों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण में वाटर बजटिंग, क्रॉप प्लानिंग, फर्टिगेशन और कृषि मशीनरी के उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
वाटर बजटिंग के जरिए किसान उपलब्ध पानी के हिसाब से खेती की योजना बना सकेंगे। वहीं, क्रॉप प्लानिंग से उन्हें जल संसाधनों के अनुसार उपयुक्त फसल चुनने में मदद मिलेगी।
24 गांवों में लागू होगा मॉडल
गंगावली में तैयार किया जा रहा यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर बुंदेलखंड के अन्य गांवों में आधुनिक जल प्रबंधन और खेती का आधार बन सकता है। भूगर्भ जल विभाग के अनुसार, इस मॉडल को पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में लागू करने की योजना है।
इससे इन गांवों के किसानों को माइक्रो इरिगेशन और वैज्ञानिक जल प्रबंधन तकनीकों से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। साथ ही, सीमित पानी में खेती को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
दिसंबर 2026 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
वर्तमान निर्माण कार्यों को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद परियोजना को जून 2029 तक Operation and Maintenance Mode में संचालित करने की योजना है।
सरकार का फोकस बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता को देखते हुए खेती का ऐसा मॉडल विकसित करने पर है, जिसमें जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीक साथ-साथ चलें। गंगावली परियोजना के परिणामों के आधार पर इसके विस्तार से 24 अन्य गांवों में भी खेती और जल प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद है।









