तेलंगाना विधानसभा में हंगामे और नारेबाजी के बाद BRS के 22 विधायक मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिए गए। KTR ने महिला विधायकों को रोके जाने और KCR पर कथित टिप्पणियों को लेकर चर्चा की मांग की।
हैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बाद भारत राष्ट्र समिति (BRS) के 22 विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। BRS सदस्यों ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नारेबाजी की और सदन के वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने कार्रवाई की।
BRS विधायकों ने सदन में ‘हमें न्याय चाहिए’ जैसे नारे लगाए। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए दो दिन पहले पार्टी की महिला विधायकों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार और विधानसभा के प्रवेश द्वार पर उन्हें रोके जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग की।
इसके अलावा BRS विधायकों ने पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के खिलाफ सत्तारूढ़ कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया।
नारेबाजी के बाद सदन के वेल में पहुंचे BRS विधायक
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही BRS के सदस्य अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कई विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही में व्यवधान नहीं डालने की अपील की।
उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने भी BRS सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। हालांकि, BRS विधायक अपनी मांगों पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध जारी रखते रहे।
अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने कहा कि यदि BRS सदस्यों ने अपनी मांगें लिखित रूप में उनके समक्ष रखी हैं, तो वह उनकी जांच करेंगे।
इसके बावजूद हंगामा जारी रहने पर सदन में निलंबन का प्रस्ताव लाया गया।
KTR ने पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से दो प्रमुख मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की।
पहला मुद्दा BRS की महिला विधायकों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार से जुड़ा था। पार्टी का आरोप है कि दो दिन पहले विधानसभा के प्रवेश द्वार पर पुलिस ने उसके विधायकों को रोका था।
दूसरा मुद्दा BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं की कथित टिप्पणियों से संबंधित था। BRS ने इन टिप्पणियों को गंभीर मुद्दा बताते हुए सदन में चर्चा की मांग की।
वहीं, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि वह और कांग्रेस के अन्य नेता के. चंद्रशेखर राव के स्वस्थ और लंबे जीवन तथा सार्वजनिक सेवा में लंबे करियर की कामना करते हैं।
उन्होंने BRS सदस्यों से कहा कि वे सदन में अपनी बात अपनी सीटों से रखें और डराने या आक्रामक तरीके से व्यवहार करने से बचें।
दलितों के अपमान का मुद्दा भी उठा
सदन में उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने BRS नेताओं की ओर से कथित तौर पर किए गए एक ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, BRS नेताओं ने एर्रावेली के पास के. चंद्रशेखर राव के फार्महाउस के निकट हल्दी मिले पानी का छिड़काव कर कथित रूप से शुद्धिकरण किया था।
यह घटना 8 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित कार्यकर्ताओं की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आई थी। प्रदर्शन BRS MLC ताता मधुसूदन की ओर से विधानसभा अध्यक्ष प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर किया गया था।
विक्रमर्का ने सवाल उठाया कि BRS आखिर कब तक दलितों का अपमान करेगी। उन्होंने कहा कि सदन और समाज के लोगों के सम्मान की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से विधानसभा अध्यक्ष के पद के सम्मान को बनाए रखने की बात कही।
श्रीधर बाबू के प्रस्ताव के बाद निलंबन
लगातार हंगामे के बीच विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने BRS विधायकों के निलंबन का प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 22 BRS विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने की घोषणा की।
निलंबित विधायकों में BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव, जी. जगदीश रेड्डी, गंगुला कमलाकर, माधवर्म कृष्णा राव, के. कौशिक रेड्डी और कई अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं।
निलंबित किए गए विधायकों की सूची में अनिल जाधव, के. मणिक राव, चिंटा प्रभाकर, कोठा प्रभाकर रेड्डी, वेमुला प्रशांत रेड्डी, मारी राजशेखर रेड्डी, पल्ला राजेश्वर रेड्डी, पी. सबिता इंद्रा रेड्डी, कल्वाकुंतला संजय, टी. श्रीनिवास यादव, डी. सुधीर रेड्डी, वी. सुनीता लक्ष्मारेड्डी, कलेरू वेंकटेश, विजयुडु और के.पी. विवेकानंद भी शामिल हैं।
119 सदस्यीय विधानसभा में BRS के 37 विधायक
तेलंगाना विधानसभा में कुल 119 सदस्य हैं। BRS की आधिकारिक सदस्य संख्या 37 है। बुधवार की कार्रवाई में पार्टी के 22 विधायकों का निलंबन विधानसभा में विपक्षी दल की सक्रिय भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।
BRS और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव पहले भी सामने आता रहा है। विधानसभा में बुधवार की घटना ने इस टकराव को और स्पष्ट कर दिया।
महिला विधायकों के मुद्दे पर बढ़ा विवाद
BRS की महिला विधायकों को विधानसभा के प्रवेश द्वार पर रोके जाने का मुद्दा पार्टी ने सदन में प्रमुखता से उठाया। KTR ने इस घटना पर चर्चा की मांग करते हुए इसे विधानसभा के भीतर उठाया।
BRS की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि सरकार की ओर से सदस्यों से सदन की प्रक्रिया का पालन करने की अपील की गई। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद के कारण सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
BRS का कहना है कि उसके विधायकों के मुद्दों को सदन में सुना जाना चाहिए। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान विरोध के तरीके पर आपत्ति जताई।
तेलंगाना में सियासी टकराव जारी
बुधवार की घटना ऐसे समय हुई है जब तेलंगाना की राजनीति में कांग्रेस सरकार और BRS के बीच लगातार राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल रहा है। विधानसभा में नारेबाजी, स्थगन प्रस्ताव और विधायकों के निलंबन ने इस टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है।
BRS के 22 विधायकों का मानसून सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबन विधानसभा की आगामी कार्यवाही पर असर डाल सकता है। वहीं, सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि सदन में अपनी बात रखने का अधिकार सभी सदस्यों को है, लेकिन कार्यवाही में व्यवधान डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
फिलहाल, BRS के सामने अपने विधायकों के निलंबन के बाद राजनीतिक और सदन के बाहर की रणनीति तय करने की चुनौती है। दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार के लिए विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना और विपक्ष के उठाए मुद्दों का जवाब देना महत्वपूर्ण होगा।
बुधवार का घटनाक्रम तेलंगाना विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव का एक और उदाहरण है। आने वाले दिनों में महिला विधायकों से जुड़े विवाद, KCR पर कथित टिप्पणियों और BRS MLC से जुड़े विवाद जैसे मुद्दे राज्य की राजनीति में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।








