बर्नपुर का 60 साल पुराना ऐतिहासिक सिनेमा हॉल ध्वस्त, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विरासत संरक्षण को लेकर उठे सवाल

बंगाल के बर्नपुर मे SAIL-ISP के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान 60 साल पुराना ऐतिहासिक सिनेमा हॉल ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने विरासत संरक्षण की मांग उठाई

पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में लगभग 60 साल पुराने ऐतिहासिक सिनेमा हॉल को भूमि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। इस फैसले से स्थानीय लोगों में निराशा है, जो इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा मानते थे।

बर्नपुर: पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में लगभग छह दशक पुराने ऐतिहासिक सिनेमा हॉल को भूमि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के इस्को स्टील प्लांट (ISP) द्वारा चलाए जा रहे भूमि पुनः प्राप्ति अभियान के तहत की गई। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ इस घटना ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सार्वजनिक उपयोग के लिए ऐतिहासिक इमारतों को बचाने की बहस भी तेज कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इमारत केवल एक बंद पड़ा सिनेमा हॉल नहीं थी, बल्कि बर्नपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। इसके ध्वस्त होने से कई लोगों की वर्षों पुरानी यादें भी मलबे में बदल गईं।

कभी इलाके का प्रमुख मनोरंजन केंद्र था बर्नपुर सिनेमा हॉल

करीब 60 वर्ष पहले स्थापित बर्नपुर सिनेमा हॉल एक समय पूरे इलाके का प्रमुख मनोरंजन केंद्र माना जाता था। उस दौर में जब डिजिटल मनोरंजन के साधन उपलब्ध नहीं थे, यह सिनेमा हॉल परिवारों, युवाओं और फिल्म प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण हुआ करता था।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि यहां नई हिंदी, बंगाली और अन्य भाषाओं की फिल्में प्रदर्शित होती थीं। सप्ताहांत और त्योहारों के दौरान हॉल के बाहर लंबी कतारें लगना आम बात थी। धीरे-धीरे समय के साथ इसकी गतिविधियां कम होती गईं और अंततः यह कई वर्षों से बंद पड़ा था।

बुलडोजर चलते ही ताजा हो गईं पुरानी यादें

रविवार को जब बुलडोजर ने इमारत को गिराना शुरू किया, तो बड़ी संख्या में स्थानीय लोग वहां एकत्र हो गए। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर बताया कि इस सिनेमा हॉल से उनकी युवावस्था की अनेक यादें जुड़ी हुई हैं।

कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने पहली फिल्म इसी हॉल में देखी थी, जबकि कई परिवारों के लिए यह सामाजिक मेल-मिलाप का महत्वपूर्ण स्थान था। इमारत के ध्वस्त होने से लोगों में भावनात्मक निराशा साफ दिखाई दी। उनका मानना है कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा था।

अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत हुई कार्रवाई

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई SAIL-ISP द्वारा अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत कंपनी की भूमि पर बने कथित अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि हाल के वर्षों में इस अभियान के दौरान विभिन्न भवनों, क्लबों, कार्यालयों और अन्य निर्माणों को भी हटाया गया है। प्रशासन का मानना है कि संबंधित भूमि SAIL-ISP के स्वामित्व में है और उसका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इसी प्रक्रिया के तहत लंबे समय से बंद पड़े बर्नपुर सिनेमा हॉल को भी हटाने का निर्णय लिया गया।

विरासत संरक्षण को लेकर उठे सवाल

हालांकि कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों के एक वर्ग ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इमारत उपयोग में नहीं थी, तब भी इसे पूरी तरह ध्वस्त करने के बजाय संरक्षित किया जा सकता था।

स्थानीय लोगों का सुझाव है कि इस ऐतिहासिक भवन का नवीनीकरण कर इसे सामुदायिक केंद्र, सांस्कृतिक सभागार, पुस्तकालय, संग्रहालय या सार्वजनिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जा सकता था। उनका मानना है कि इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रहती और लोगों को एक उपयोगी सार्वजनिक स्थान भी मिल जाता।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कई देशों में पुराने सिनेमाघरों और औद्योगिक इमारतों को संरक्षित कर आधुनिक उपयोग के अनुरूप विकसित किया जाता है, जिससे सांस्कृतिक विरासत और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाया जा सके।

बदलते शहरों के साथ बदल रही है विरासत की तस्वीर

शहरी विकास और भूमि प्रबंधन के कारण दुनिया के कई शहरों में पुराने भवनों को हटाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन इसके साथ ही यह बहस भी लगातार चलती रही है कि किन ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित किया जाना चाहिए और किन्हें नए विकास कार्यों के लिए हटाना उचित होगा।

शहरी योजनाकारों का मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक संरचना को हटाने से पहले उसकी सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक उपयोगिता का व्यापक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि भवन संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हो, तो उसे नए उद्देश्य के लिए विकसित करना कई बार बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

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