राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक पेश करने की केंद्र सरकार की कोशिश सोमवार को विपक्ष के कड़े विरोध के कारण टल गई। तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और CPI (M) समेत कई दलों ने आरोप लगाया कि बिल की प्रति सांसदों को तय 48 घंटे पहले उपलब्ध नहीं कराई गई, जो संसदीय नियमों का उल्लंघन है। इस वजह से विधेयक की पेशी को फिलहाल टाल दिया गया।
नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक को पेश करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। विपक्षी दलों ने संसदीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस बिल का कड़ा विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने दावा किया कि बिल की प्रति सदस्यों को निर्धारित 48 घंटे पहले उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण इसकी पेशी रोकी गई।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से संसदीय प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। विरोध के दौरान पार्टी के सांसदों ने वॉकआउट किया। इसके साथ ही कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और CPI (M) ने भी इस मुद्दे पर सरकार का विरोध किया और जल्दबाजी में कानून पारित करने के खिलाफ चेतावनी दी।
विपक्ष ने उठाया 48 घंटे के नियम का मुद्दा
संसद में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बिल की प्रति सदस्यों को 48 घंटे पहले नहीं देने का मामला उठाया। उन्होंने सरकार से संसदीय प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी कि बिना नियमों का पालन किए विधेयक पारित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ होगा। इसके बाद कई विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट भी किया।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और CPI (M) ने भी इस मुद्दे पर सरकार का विरोध किया। स्थिति को देखते हुए सरकार ने CAPF बिल को फिलहाल पेश करने का फैसला टाल दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक कर सहमति बनाने की कोशिश की, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी इस बैठक में शामिल रहे। वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अन्य दलों के नेताओं के साथ अलग रणनीति बैठक की।
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CAPF बिल: क्या है उद्देश्य?
प्रस्तावित CAPF बिल का उद्देश्य देश के पांच प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों — CRPF, BSF, ITBP, SSB और CISF — के लिए एकीकृत प्रशासनिक ढांचा तैयार करना है। फिलहाल ये सभी बल अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं। बिल के जरिए भर्ती, प्रमोशन, डेपुटेशन और सेवा शर्तों को एक समान करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, IPS अधिकारियों की वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति को औपचारिक रूप देने की बात भी बिल में शामिल है।
बिल के अनुसार, इंस्पेक्टर जनरल (IG) स्तर के 50 प्रतिशत पद IPS अधिकारियों के जरिए भरे जाएंगे। एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) स्तर पर यह संख्या कम से कम 67 प्रतिशत होगी। जबकि स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) और डायरेक्टर जनरल (DG) स्तर पर पूरी तरह IPS अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है।
इस प्रावधान को लेकर CAPF के भीतर विवाद गहराया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे उनके भीतर वरिष्ठ पदों के अवसर सीमित हो सकते हैं।CAPF विधेयक सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद पेश किया गया है, जिसमें CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने और कैडर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि प्रस्तावित बिल इन निर्देशों के विपरीत प्रतीत होता है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद बढ़ गया है।










