भारत सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कर सुधार किया है। नए अध्यादेश के तहत Foreign Institutional Investors द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में किए गए निवेश पर लगने वाला लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर (Long-Term Capital Gains Tax) पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने और रुपये पर बने दबाव को कम करने के उद्देश्य से एक बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश पर मिलने वाले पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) से छूट प्रदान करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और लगातार विदेशी पूंजी की निकासी ने भारतीय वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है।
क्या है नया अध्यादेश?
नए प्रावधान के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारत की सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (Long-Term Capital Gains Tax) को समाप्त कर दिया गया है। पहले इस तरह के निवेश से होने वाले मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत तक का टैक्स लागू था, जिसे जुलाई 2024 के बजट में संशोधित किया गया था।
अब सरकार ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार अधिक आकर्षक बन गया है। इस फैसले का उद्देश्य लंबी अवधि के स्थिर विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और भारत के ऋण बाजार में वैश्विक भागीदारी को मजबूत करना है।

विदेशी निवेश में गिरावट के बीच बड़ा कदम
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयर बाजारों से भारी निकासी देखी जा रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से अरबों डॉलर की पूंजी निकाली है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। लगातार पूंजी बहिर्वाह ने रुपये पर भी दबाव बढ़ाया है और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स छूट का यह कदम विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में दोबारा आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रुपये पर दबाव और वैश्विक कारण
भारतीय मुद्रा हाल के महीनों में दबाव में रही है। महंगे कच्चे तेल, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने रुपये की स्थिति को प्रभावित किया है।इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (Risk Aversion) के कारण निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं।
इन सभी कारणों ने मिलकर भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ाया है और इसे वैश्विक मुद्रा बाजार में कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल कर दिया है।
सरकारी प्रतिभूतियां (Government Securities या G-Secs) केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए सुरक्षित ऋण साधन होते हैं। इनके माध्यम से सरकारें अपने विकास कार्यों और वित्तीय आवश्यकताओं के लिए धन जुटाती हैं।
इन प्रतिभूतियों को सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इन्हें सरकार की गारंटी प्राप्त होती है। अब तक विदेशी निवेशकों को इन प्रतिभूतियों से होने वाले लाभ पर टैक्स देना पड़ता था, जिससे उनकी वास्तविक आय प्रभावित होती थी। नए नियम के बाद यह बाधा समाप्त हो गई है।











