चैती छठ 2026: दूसरे दिन खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का व्रत

23 मार्च को मनाया जाने वाला खरना व्रत 36 घंटे का निर्जला उपवास है। खीर का प्रसाद ग्रहण कर सूर्य और छठी मैया की आराधना की जाती है।

Chaiti Chhath 2026 के दूसरे दिन यानी 23 मार्च को ‘खरना’ पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन व्रतधारी खीर का प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं। छठ पूजा सूर्य देवता और छठी मैया को समर्पित है और इसे करने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली मिलती है।

Chaiti Chhath 2026 Kharna: आज 23 मार्च, सोमवार को चैती छठ का दूसरा दिन ‘खरना’ मनाया जा रहा है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित नेपाल के कुछ हिस्सों में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन व्रतधारी सुबह स्नान कर खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं और इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है। इस पूजा में व्रतधारी सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना करती हैं।

खरना का महत्व और विधि

खरना चैती छठ का विशेष दिन है, जब व्रतधारी पूरे दिन उपवास का संकल्प लेती हैं। संध्या समय में छठी मैया की पूजा के बाद खीर, मीठी रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। यह प्रसाद ग्रहण करने के तुरंत बाद निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है, जो अगले दिन पारण तक चलता है।

पूजा के समय शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना होता है। पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना और सामग्री जैसे खीर, फल, नारियल और ठेकुआ तैयार करना अनिवार्य है।

36 घंटे का निर्जला व्रत

खरना के बाद व्रतधारी 36 घंटे तक अन्न-जल का सेवन नहीं करतीं। यह कठिन व्रत सूर्य उपासना और प्रकृति पूजा का प्रतीक माना जाता है। व्रतधारी कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव और छठी मैया को जल-दूध से अर्घ्य देती हैं। यह परंपरा परिवार की खुशहाली, सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए की जाती है।

व्रत के दौरान अनुशासन, संयम और भक्ति का विशेष महत्व है। पारण के समय ही व्रतधारी पानी और भोजन ग्रहण कर अपनी तपस्या पूर्ण करती हैं।

पूजा सामग्री और अर्घ्य की परंपरा

छठ पूजा में बांस के सूप या दउरा में ठेकुआ, मौसमी फल, फूल, नारियल और गन्ना सजाया जाता है। अर्घ्य देने के समय व्रतधारी सूर्यास्त और उगते सूर्य के समय जल और दूध अर्पित करती हैं। कई लोग घर की छत या आंगन में जलभराव कर भी पूजा करते हैं।

यह परंपरा चार दिवसीय छठ पर्व को पूर्णता प्रदान करती है और व्रतधारी की भक्ति और आस्था को दर्शाती है।

छठ पर्व का सामाजिक और धार्मिक महत्व

छठ पूजा सूर्य और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनूठा संगम है। इस पर्व को करने से न केवल पारिवारिक सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य मिलता है बल्कि समाज में सहयोग, सामंजस्य और अनुशासन की भावना भी बढ़ती है।

कई लोग छठ पर्व के दौरान नदी, घाट या सरोवर पर जाकर सामूहिक पूजा में भाग लेते हैं, जिससे समुदायिक जुड़ाव और सामाजिक सद्भाव बढ़ता है।

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