चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह से की मुलाकात, गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना आगे बढ़ाने की मांग

आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना, पर धन जारी करने की मांग की

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दिल्ली में अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। उन्होंने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को आगे बढ़ाने और पोलावरम तथा जल जीवन मिशन के लिए समय पर धन जारी करने की मांग की।

अमरवती: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अपनी दो दिवसीय दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने राज्य से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा की और गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से पहल करने का अनुरोध किया। नायडू ने इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से भी मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने पोलावरम सिंचाई परियोजना और जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा (JJM-AJ) योजना के तहत चल रहे कार्यों के लिए समय पर धन जारी करने की मांग उठाई। राज्य सरकार के अनुसार, JJM-AJ योजना के तहत लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत से काम किए जा रहे हैं।

इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य आंध्र प्रदेश की प्रमुख जल संसाधन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र का सहयोग प्राप्त करना था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में केंद्र सरकार की ओर से किसी नई वित्तीय मंजूरी, निर्धारित भुगतान तारीख या परियोजना की समयसीमा की घोषणा का विवरण नहीं है।

अमित शाह के सामने उठाए राज्य के लंबित मुद्दे

मुख्यमंत्री नायडू ने अमित शाह के साथ बैठक में आंध्र प्रदेश से जुड़े कई लंबित विषयों पर चर्चा की। इनमें अगस्त में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान उठाए गए मुद्दे भी शामिल थे।

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच आपसी समन्वय, प्रशासनिक सहयोग और अंतरराज्यीय विषयों पर चर्चा का मंच है। ऐसे मंचों पर उठाए गए मामलों में जल संसाधन, सीमा से जुड़े विवाद, बुनियादी ढांचा और राज्यों के बीच सहयोग जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

नायडू ने अमित शाह से गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने ऐसे अन्य मुद्दे भी उठाए, जिनमें राज्य को केंद्र सरकार के हस्तक्षेप या सहयोग की आवश्यकता है।

हालांकि, बैठक के दौरान किन अन्य विषयों पर चर्चा हुई और उन पर क्या निर्णय लिया गया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना पर क्यों है जोर?

गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य नदी जल के उपयोग और संभावित हस्तांतरण के माध्यम से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है। भारत में नदी जोड़ो योजनाओं पर चर्चा का एक प्रमुख आधार उन क्षेत्रों के बीच जल उपलब्धता में अंतर है, जहां अलग-अलग मौसमों में पानी की मांग और उपलब्धता अलग रहती है।

आंध्र प्रदेश के लिए गोदावरी नदी का महत्व सिंचाई, कृषि और जल प्रबंधन से जुड़ा है। वहीं, कावेरी नदी बेसिन भी दक्षिण भारत में कृषि और पेयजल की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित नदी जोड़ो योजना को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी अध्ययन, पर्यावरणीय आकलन, वित्तीय व्यवस्था और संबंधित राज्यों के बीच समन्वय जैसे पहलुओं पर विचार करना आवश्यक होगा।

ऐसी परियोजनाओं में पानी की उपलब्धता, जलाशयों की स्थिति, नदी प्रवाह, पर्यावरणीय प्रभाव और विभिन्न राज्यों की जरूरतों का आकलन महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और पानी के बंटवारे से जुड़े प्रश्न भी निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

नायडू की मांग के बाद परियोजना को लेकर केंद्र की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। हालांकि, मुलाकात के दौरान परियोजना को औपचारिक मंजूरी मिलने या निर्माण कार्य शुरू करने की कोई नई समयसीमा घोषित किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पोलावरम परियोजना के लिए समय पर फंड की मांग

नायडू ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ बैठक में पोलावरम परियोजना के लिए समय पर धन जारी करने का मुद्दा उठाया। पोलावरम आंध्र प्रदेश की प्रमुख सिंचाई और जल संसाधन परियोजनाओं में शामिल है।

इस परियोजना का संबंध सिंचाई, जल भंडारण और क्षेत्रीय जल प्रबंधन से है। इसके पूरा होने और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप संचालन से कृषि तथा अन्य जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। परियोजना की प्रगति के लिए निर्माण कार्य, वित्तीय सहायता और संबंधित विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हैं।

नायडू ने केंद्र से आग्रह किया कि परियोजना के लिए आवश्यक राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि कार्यों में वित्तीय कारणों से बाधा न आए। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी राशि लंबित है या केंद्र सरकार ने भुगतान के लिए कोई निश्चित समयसीमा दी है।

पोलावरम जैसी बड़ी परियोजनाओं में वित्तीय आवंटन और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए परियोजना की स्थिति का आकलन करने के लिए स्वीकृत राशि, जारी धन, खर्च और शेष कार्यों से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों को देखना जरूरी है।

जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा के लिए ₹30,000 करोड़ की योजना

जल शक्ति मंत्री के साथ बैठक में नायडू ने जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा योजना के तहत चल रहे कार्यों के लिए भी समय पर धन जारी करने की मांग की। समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत से काम किए जा रहे हैं।

जल जीवन मिशन का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की पहुंच बढ़ाना है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन और जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाता है। आंध्र प्रदेश में इस योजना के तहत चल रहे कार्यों की गति और वित्तीय उपलब्धता राज्य के जल आपूर्ति संबंधी लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

नायडू ने केंद्र से कहा कि परियोजनाओं के लिए धन समय पर जारी किया जाना चाहिए। वित्तीय सहायता में समयबद्धता से निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और जल आपूर्ति ढांचे से जुड़े कामों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ₹30,000 करोड़ की कुल लागत के मुकाबले अब तक जारी धन, खर्च की गई राशि या शेष कार्यों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इन पहलुओं की पुष्टि के लिए राज्य सरकार और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े आवश्यक होंगे।

केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की भूमिका

आंध्र प्रदेश की प्रमुख जल परियोजनाओं में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। बड़ी सिंचाई और पेयजल योजनाओं में वित्तीय सहायता के अलावा तकनीकी मंजूरी, निर्माण की निगरानी, पर्यावरणीय अनुपालन और विभिन्न विभागों की भूमिका भी अहम होती है।

नदी जोड़ो परियोजनाओं में अंतरराज्यीय सहयोग की जरूरत और बढ़ जाती है, क्योंकि नदी बेसिन और जल प्रवाह प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं होते। ऐसे मामलों में संबंधित राज्यों के हितों और जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने पड़ते हैं।

नायडू की दिल्ली यात्रा के दौरान हुई बैठकों को आंध्र प्रदेश की लंबित परियोजनाओं पर केंद्र के साथ संवाद के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन किसी परियोजना को गति मिलने का वास्तविक आकलन तभी किया जा सकेगा, जब वित्तीय मंजूरी, धन जारी होने या निर्माण से जुड़े ठोस निर्णय सामने आएंगे।

आगे क्या होगा?

अब ध्यान केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और राज्य की परियोजनाओं से जुड़े अगले आधिकारिक कदमों पर रहेगा। गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना के संबंध में तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया की स्थिति, पोलावरम के लिए धन जारी करने का कार्यक्रम तथा जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा के लंबित कार्यों की प्रगति महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, नायडू ने केंद्र के सामने राज्य की प्राथमिकताओं को रखा है और परियोजनाओं के लिए समय पर वित्तीय सहायता की मांग की है। उपलब्ध विवरण में किसी नई मंजूरी या भुगतान की पुष्टि नहीं हुई है।

निष्कर्ष: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने नई दिल्ली में अमित शाह और सीआर पाटिल से मुलाकात कर नदी जोड़ो परियोजना, पोलावरम और जल जीवन मिशन से जुड़े मुद्दे उठाए। इन योजनाओं की आगे की प्रगति केंद्र के निर्णयों, वित्तीय सहायता और संबंधित राज्यों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी।

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