कांग्रेस से गठबंधन क्यों टूटा? चंद्रशेखर आजाद ने बताई वजह, 2027 चुनाव के लिए रखीं शर्तें

चंद्रशेखर आजाद ने कांग्रेस से गठबंधन टूटने की वजह बताई है। साथ ही उन्होंने 2027 के चुनाव को लेकर अपनी शर्तें भी रखीं। जानें आजाद समाज पार्टी की रणनीति और गठबंधन

विधानसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत लगभग अंतिम दौर में पहुंच गई थी, लेकिन एक शर्त के चलते सहमति नहीं बन पाई। 

Chandrashekhar Azad Alliance: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी समीकरण बनने लगे हैं। इसी बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कांग्रेस के साथ गठबंधन, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती और विपक्षी एकजुटता को लेकर अहम बयान दिए हैं। 

एक विशेष पॉडकास्ट में उन्होंने खुलासा किया कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत तीन राज्यों में सीटों और साझेदारी को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2027 के चुनाव से पहले किसी भी गठबंधन के लिए मुद्दों और राजनीतिक हिस्सेदारी पर बातचीत जरूरी होगी।

कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों नहीं हो पाया?

चंद्रशेखर आजाद के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने प्रस्ताव रखा था कि यदि दोनों दल साथ आते हैं, तो गठबंधन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उत्तराखंड और पंजाब में भी लागू होना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस की ओर से पहले उत्तर प्रदेश में गठबंधन को अंतिम रूप देने और बाकी दो राज्यों पर बाद में विचार करने की बात कही गई थी। 

हालांकि, चंद्रशेखर इस प्रस्ताव से सहमत नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि एक राज्य में किसी पार्टी के साथ चुनाव लड़ना और पड़ोसी राज्य में उसी पार्टी के खिलाफ खड़ा होना राजनीतिक रूप से उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, इसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई और गठबंधन की संभावना समाप्त हो गई। चंद्रशेखर के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रियंका गांधी से रिश्तों पर क्या बोले चंद्रशेखर?

पॉडकास्ट के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लोकसभा में मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी ने उनसे पूछा था कि क्या वह उनसे नाराज हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि वह प्रियंका गांधी को हमेशा दीदी कहकर संबोधित करते रहे हैं और उनके मन में व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि चुनावी गठबंधन केवल व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दों और उचित हिस्सेदारी के आधार पर होना चाहिए।

उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भविष्य में कांग्रेस के साथ बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं है, लेकिन किसी समझौते के लिए दोनों पक्षों के बीच शर्तों पर सहमति जरूरी होगी।

2027 चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक को क्या संदेश दिया?

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए चंद्रशेखर आजाद ने विपक्षी गठबंधन को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी या समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से आमंत्रण मिलने भर से गठबंधन नहीं हो जाएगा। इसके लिए पहले मुद्दों और राजनीतिक हिस्सेदारी पर चर्चा करनी होगी।

चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दल विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के बावजूद सीटों को लेकर बातचीत करते हैं, तो उनकी पार्टी को भी अपनी हिस्सेदारी तय करने का अधिकार है।

उन्होंने दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदायों के बीच राजनीतिक एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यदि इन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है, तो उत्तर प्रदेश का चुनावी मुकाबला काफी बदल सकता है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है, चुनावी परिणामों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

ओवैसी के साथ गठबंधन के संकेत

चंद्रशेखर आजाद ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ संभावित राजनीतिक सहयोग के सवाल पर भी चर्चा की। उनके बयानों को विपक्षी दलों के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन कई सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि अलग-अलग राजनीतिक दल इन समुदायों को साथ लाने की कोशिश करते हैं, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, ओवैसी के साथ किसी औपचारिक गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय या समझौते की पुष्टि के बिना इसे संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में ही देखना उचित होगा।

मायावती को बताया उत्तर प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री

बसपा प्रमुख मायावती के साथ अपने संबंधों पर बात करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने एक दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने मायावती को उत्तर प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बताया, जबकि दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। मायावती की ओर से नगीना में उनकी जीत को ईवीएम से जोड़ने संबंधी टिप्पणी पर चंद्रशेखर ने सवाल उठाया। 

उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव केवल नगीना में हुआ था। उनके मुताबिक, मायावती ने जब उनसे रिश्ता नहीं रखने की बात कही, तो उन्होंने उनके फैसले को स्वीकार कर लिया। इस बयान से स्पष्ट है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद चंद्रशेखर ने मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में सकारात्मक राय व्यक्त की है।

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