झारखंड के चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक युवक को ग्रामीणों द्वारा घर में बंधक बनाए जाने की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने पथराव कर दिया। सिदपा गांव में हुई इस घटना में टंडवा थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक पप्पू शर्मा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। थाना प्रभारी के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई है और उन्हें इलाज के लिए एनटीपीसी के संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने और पुलिस टीम को सुरक्षित निकालने के लिए तीन राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी। चतरा एसपी अनिमेष नैथानी ने हवाई फायरिंग की पुष्टि की है।
घटना की शुरुआत एक युवक को लेकर ग्रामीणों के बीच हुए विवाद से हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, गांव में एक महिला के साथ कथित गलत हरकत या दुष्कर्म के आरोप को लेकर ग्रामीण आक्रोशित थे। ग्रामीणों ने युवक के साथ मारपीट करने के बाद उसे एक घर में बंद कर दिया था। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची, ताकि युवक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।
पथराव अचानक इतना तेज हो गया कि पुलिसकर्मियों को अपनी सुरक्षा के लिए पीछे हटना पड़ा। इसी दौरान टंडवा थाना प्रभारी पप्पू शर्मा को सिर में पत्थर लगने से गंभीर चोट आई। कुछ रिपोर्टों में उनके सिर पर टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। घायल थाना प्रभारी को तत्काल एनटीपीसी के संजीवनी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया। घटना में अन्य पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है।
स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को तीन राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी, जिसके बाद पुलिस टीम गांव से बाहर निकल सकी। चतरा एसपी अनिमेष नैथानी ने भी हवाई फायरिंग की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि बेकाबू भीड़ के बीच पुलिस टीम को सुरक्षित निकालना और कानून-व्यवस्था बहाल करना था।
इस घटना के बाद पुलिस ने अतिरिक्त बल को सिदपा गांव भेजा। टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन बड़वार और चतरा एसडीपीओ सन्नी वर्धन के संयुक्त नेतृत्व में पुलिस लाइन से स्पेशल फोर्स को मौके पर भेजे जाने की जानकारी है। आसपास के थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया, जिसके बाद गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
पुलिस के सामने इस पूरे मामले में दो स्तर पर जांच की चुनौती है। पहला, जिस युवक को ग्रामीणों ने कथित आरोपों के बाद अपने कब्जे में रखा था, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करना। दूसरा, पुलिस टीम पर पथराव करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों की पहचान करना। पुलिस ने ऐसे लोगों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन पर पुलिस टीम पर हमला करने का आरोप है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने के बाद भी इलाके में तनाव बना रहा। पुलिस ने ग्रामीणों से कानून अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की और पूरे मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की बात कही। बाद में बंधक बनाए गए युवक को पुलिस ने सुरक्षित मुक्त करा लिया। लाइव हिन्दुस्तान के अनुसार, युवक को देर रात करीब 11 बजे मुक्त कराया गया।
घटना के दौरान पुलिस वाहनों पर भी पथराव और तोड़फोड़ की बात कुछ स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में घायल पुलिसकर्मियों की संख्या और घटनाक्रम के कुछ विवरणों में अंतर है। इसलिए पुलिस की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हमले में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए और संपत्ति को कितना नुकसान हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने के बाद भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है। पुलिस किसी आरोपी या संदिग्ध को ग्रामीणों के कब्जे से निकालने पहुंचती है तो उसका उद्देश्य मामले को कानूनी प्रक्रिया में लाना होता है। लेकिन यदि भीड़ पुलिस पर ही हमला कर दे, तो स्थिति तेजी से हिंसक हो सकती है। चतरा की घटना में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां युवक को छुड़ाने पहुंची पुलिस टीम खुद पथराव का निशाना बन गई।
घटना के बाद गांव में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का फोकस अब स्थिति को सामान्य बनाए रखने के साथ-साथ उन लोगों की पहचान करने पर है, जिन्होंने पुलिस टीम पर हमला किया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और ग्रामीणों ने युवक को अपने कब्जे में क्यों रखा। महिला से जुड़े लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। अभी आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना गया है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
चतरा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर टंडवा थाना समेत जिले के विभिन्न थानों और पुलिस अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध है। इससे यह भी स्पष्ट है कि टंडवा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस तंत्र के पास है और गंभीर परिस्थितियों में आसपास के थानों से अतिरिक्त बल बुलाया जा सकता है।
फिलहाल सिदपा गांव में स्थिति पुलिस की निगरानी में है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून हाथ में न लेने की अपील की है। घटना में थाना प्रभारी के घायल होने और पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ने से मामला गंभीर माना जा रहा है। अब पुलिस जांच के बाद यह सामने आएगा कि पथराव में कौन-कौन लोग शामिल थे, उनके खिलाफ क्या धाराएं लगाई जाती हैं और महिला से जुड़े मूल आरोप की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि किसी भी आपराधिक आरोप के बाद भीड़ द्वारा खुद सजा देने या किसी व्यक्ति को बंधक बनाने की कोशिश कानूनन उचित नहीं है। आरोप की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया से होती है। पुलिस की भूमिका आरोपी या संदिग्ध को हिरासत में लेकर निष्पक्ष जांच करना है। चतरा में पुलिस पर हुए हमले के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि गांव में शांति बनी रहे और पूरे मामले की जांच बिना किसी दबाव के आगे बढ़े।










