लखनऊ में आयुष छात्रों ने 15 साल से स्टाइपेंड नहीं बढ़ने के विरोध में गांधी प्रतिमा पर धरना दिया। छात्रों ने ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25 हजार मासिक स्टाइपेंड करने और डिप्टी CM से मुलाकात की मांग की।
लखनऊ: आयुष छात्रों ने बुधवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना देकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठाई। छात्रों का कहना है कि 2011 से उन्हें ₹7,500 मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि पिछले 15 वर्षों में महंगाई काफी बढ़ चुकी है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे बढ़ाकर ₹25 हजार करने और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की मांग की है।
15 साल से स्टाइपेंड नहीं बढ़ने पर प्रदर्शन
लखनऊ में आयुष छात्रों ने बुधवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के सामने बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे। छात्रों का कहना है कि वर्ष 2011 से उन्हें ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है और 2026 तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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तेज धूप के बावजूद छात्र प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। कुछ छात्र छाता लेकर पहुंचे थे, जबकि कई ने पोस्टर और बैनर से धूप से बचने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों ने 'मेहनत हमारी पूरी है, 25 हजार मांग जरूरी है' और 'काम हमारा पूरा, स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा' जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि मौजूदा ₹7,500 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹25 हजार किया जाए। इसके साथ ही छात्र डिप्टी सीएम से मुलाकात की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
मरीजों के इलाज में जिम्मेदारी निभाने का दावा
आयुष छात्रों का कहना है कि कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के साथ इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों के इलाज और अन्य चिकित्सकीय कार्यों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है।
छात्रों के मुताबिक, मौजूदा महंगाई में ₹7,500 प्रतिमाह से रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल है। खासकर शहरों में किराए के कमरे में रहने वाले छात्रों पर आर्थिक दबाव ज्यादा है। उनका कहना है कि किराया, भोजन, यात्रा और पढ़ाई से जुड़े खर्चों के बाद इतनी राशि पर्याप्त नहीं रहती।
'एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई'
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर पवन शुक्ला ने कहा कि आयुर्वेद के छात्र NEET के जरिए दाखिला लेते हैं। इसके बाद साढ़े चार साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप पूरी करनी होती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से 2026 आ गया, लेकिन उनके स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। उनके अनुसार, कई छात्र किराए के कमरों में रहते हैं और मौजूदा स्टाइपेंड में कमरे का किराया तक निकालना मुश्किल है।
डॉ. पवन शुक्ला ने कहा कि आयुष इंटर्न को करीब ₹250 प्रतिदिन के हिसाब से राशि मिलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले 15 वर्षों में महंगाई और रोजमर्रा के खर्च काफी बढ़ चुके हैं तो स्टाइपेंड में बदलाव क्यों नहीं किया गया।
MBBS और BDS इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड की मांग
छात्रों ने MBBS और BDS इंटर्न का उदाहरण देते हुए समान स्टाइपेंड की मांग की है। उनका कहना है कि MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि आयुष छात्रों को अब भी पुरानी राशि दी जा रही है।
डॉ. पवन शुक्ला ने बताया कि MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड ₹12 हजार से बढ़ाकर ₹25 हजार किया गया था। उनका कहना है कि आयुष इंटर्न भी मरीजों से जुड़े कार्य करते हैं और उनकी जिम्मेदारियां कम नहीं हैं।
छात्रों का तर्क है कि यदि काम और जिम्मेदारी में समानता है तो स्टाइपेंड में भी समानता होनी चाहिए। इसी आधार पर वे ₹25 हजार मासिक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।
प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न
प्रदर्शनकारी प्रखर सिंह चौहान के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में शुरू किया गया ₹7,500 का स्टाइपेंड मौजूदा परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि दूध, पेट्रोल, राशन, सब्जी और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ चुकी हैं। शहर में किराए पर रहने वाले छात्र का मासिक खर्च करीब ₹20 हजार से ₹25 हजार तक पहुंच सकता है।
छात्रों का कहना है कि वे ऐसा स्टाइपेंड चाहते हैं जिससे उन्हें रोजमर्रा के खर्च के लिए परिवार से अतिरिक्त पैसे न मांगने पड़ें।
डिप्टी CM से मुलाकात के आश्वासन पर उठे सवाल
छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने एक दिन पहले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की थी। उनके अनुसार, उन्हें शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनकी मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रखर सिंह चौहान ने कहा कि आश्वासन के बावजूद अगले दिन छात्रों को फिर धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी उनसे मिलने को तैयार नहीं हैं और मंत्री स्तर से मिले आश्वासन पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
फिलहाल छात्र अपनी मांगों को लेकर गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे हैं और डिप्टी सीएम से मुलाकात तथा स्टाइपेंड बढ़ाने के फैसले की मांग कर रहे हैं।









