छत्तीसगढ़ में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं से कनेक्टिविटी, औद्योगिक परिवहन और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वय से विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य मजबूत होगा।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। राज्य में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं जारी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुताबिक, नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण से औद्योगिक क्षेत्रों के साथ दूरदराज के इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे माल ढुलाई, यात्री सुविधाओं और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रेल परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती
छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क के विस्तार को औद्योगिक विकास, बेहतर परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में कुल 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। इन परियोजनाओं में नई रेल लाइनें बिछाने, मौजूदा मार्गों के दोहरीकरण, विद्युतीकरण और रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने जैसे काम शामिल हैं।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है। उनके मुताबिक, डबल इंजन सरकार के प्रयासों से रेल सुविधाओं में सुधार होगा और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क से कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और सीमेंट जैसे उत्पादों की ढुलाई आसान हो सकती है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और निवेश को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा कॉरिडोर से माल ढुलाई को बढ़ावा
रेल नेटवर्क विस्तार की प्रमुख योजनाओं में करीब 278 किलोमीटर लंबा खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर शामिल है। अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। शुरुआती अनुमानित लागत 8,741 करोड़ रुपये थी, जिसे संशोधन के बाद 7,854 करोड़ रुपये बताया गया।
इस कॉरिडोर का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों पर दबाव कम करना और माल तथा यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे बलौदाबाजार समेत औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है। मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम होने से उद्योगों को प्रमुख बाजारों और बंदरगाहों तक सामान पहुंचाने में भी सुविधा मिल सकती है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ के रेलवे बजट का आवंटन 7,470 करोड़ रुपये किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2009-14 के दौरान राज्य को औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना आवंटित किए जाते थे। इस तुलना में मौजूदा वार्षिक आवंटन काफी अधिक है।
बस्तर और दूरदराज के इलाकों तक रेल पहुंचाने की योजना
रेल परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बस्तर और अन्य सीमित कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को नेटवर्क से जोड़ना है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन की लंबाई करीब 140 किलोमीटर है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं किरंदुल-कोत्तागुडेम तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल रेल लाइन से जुड़ी योजनाओं के सर्वेक्षण पर काम चल रहा है।
दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक 77 किलोमीटर के हिस्से में रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। आगे रावघाट तक संपर्क विकसित करने की योजना है। परियोजना पूरी होने पर लौह अयस्क की खदानों और भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह मार्ग कई कस्बों और क्षेत्रों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित है। इसके बनने से कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को लाभ मिलने की संभावना है।
उत्तर छत्तीसगढ़ में भी रेल संपर्क बढ़ाने की तैयारी
उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा और अंबिकापुर-बरवाडीह जैसे रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं से संबंधित मंजूरी और सर्वेक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
इन प्रस्तावों का महत्व केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। बेहतर रेल संपर्क से खनिज परिवहन, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं का वास्तविक लाभ उनकी मंजूरी, निर्माण की गति और समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 32 स्टेशनों का विकास
नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है।
इन स्टेशनों पर बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ परिसर, दिव्यांगजन के अनुकूल सुविधाएं और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों के उन्नयन को भी राज्य में रेल सुविधाओं के विकास से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है। रेल नेटवर्क के विस्तार और स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।








