छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट से बड़ा हादसा हुआ। इसमें 4 मजदूरों की मौत हो गई और 30-40 लोग झुलस गए। कई घायलों की हालत गंभीर है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सक्ती: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में मंगलवार दोपहर एक बड़ा औद्योगिक हादसा हुआ, जब वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट हो गया। यह घटना डभरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिंघीतराई स्थित प्लांट में करीब 2 बजे हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में अब तक कम से कम 4 मजदूरों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों की संख्या बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या 9 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कैसे हुआ हादसा: काम के दौरान अचानक फटा बॉयलर ट्यूब
जानकारी के मुताबिक, प्लांट में रोज की तरह सामान्य काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक बॉयलर की ट्यूब फट गई, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ।
विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। कई मजदूर मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी और कुछ ही मिनटों में पूरा प्लांट धुएं और अफरा-तफरी से भर गया।

30–40 मजदूर झुलसे, कई की हालत गंभीर
हादसे में 30 से 40 मजदूरों के झुलसने की पुष्टि की गई है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भेजा गया।
11 मजदूरों को Padmavati Hospital Kharsia में भर्ती कराया गया है, जबकि लगभग 15 घायलों को रायगढ़ स्थित Jindal Fortis Hospital Raigarh में इलाज के लिए ले जाया गया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई मरीज 70–90% तक झुलसे हुए हैं, जिससे उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
जिंदल अस्पताल में मौतों की आशंका, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
रायगढ़ के जिंदल अस्पताल में भर्ती 15 घायलों में से 5 की मौत की खबर सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अस्पताल में लगातार डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है, और गंभीर मरीजों को रायपुर के बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने की भी तैयारी की जा रही है।
राहत और बचाव कार्य में जुटा प्रशासन
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
Dabhra Police Station क्षेत्र की पुलिस ने पूरे प्लांट को घेरकर राहत कार्य शुरू किया। फायर ब्रिगेड की मदद से आग और धुएं को नियंत्रित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बॉयलर ट्यूब फटने को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
प्लांट में मची अफरा-तफरी, कामकाज ठप
विस्फोट के बाद पूरे पावर प्लांट में कामकाज पूरी तरह रुक गया। मजदूरों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई लोग अपने साथियों को बचाने के लिए घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन गर्मी और धुएं के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कतें आईं।
स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्लांट के आसपास के क्षेत्र को खाली करा दिया है और प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
हादसे की वजह की जांच शुरू
प्रशासन ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है, जो यह पता लगाएगी कि बॉयलर ब्लास्ट किस कारण हुआ—क्या यह तकनीकी खराबी थी या रखरखाव में लापरवाही।
प्लांट में सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पावर प्लांट्स में नियमित मेंटेनेंस और सेफ्टी ऑडिट बेहद जरूरी हैं, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
मजदूर संगठनों ने भी मांग की है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जाए।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
हालांकि प्रशासन ने अभी आधिकारिक तौर पर 4 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन अलग-अलग अस्पतालों में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की स्थिति को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है।










