चित्तौड़गढ़ में कुएं में मिला मृत लेपर्ड: दो दिन की तलाश के बाद 40 फीट गहरे कुएं से शव बरामद

चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र के अमोलिया गांव में 40 फीट गहरे कुएं में लेपर्ड मृत मिला। दो दिनों से तलाश कर रही वन विभाग टीम ने दो घंटे तक चला रेस्क्यू

चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र के अमोलिया गांव में 40 फीट गहरे कुएं में लेपर्ड मृत मिला। दो दिनों से तलाश कर रही वन विभाग टीम ने दो घंटे के रेस्क्यू के बाद शव बाहर निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड के अमोलिया गांव में पिछले दो दिनों से फैली दहशत का अंत उस समय हुआ जब ग्रामीणों को पता चला कि इलाके में घूम रहा लेपर्ड एक खुले कुएं में मृत मिला है। यह घटना रविवार रात की है, जब वन विभाग की टीम ने करीब 40 फीट गहरे कुएं से लेपर्ड का शव बरामद किया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में राहत और चिंता दोनों की स्थिति देखने को मिली।

मवेशियों पर हमले के बाद से सक्रिय था वन विभाग

पिछले दो दिनों से यह लेपर्ड गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार देखा जा रहा था। इस दौरान उसने कई मवेशियों पर हमला भी किया था, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया था। लोग शाम होते ही घरों में रहने लगे थे और खेतों में जाना लगभग बंद कर दिया गया था। लगातार शिकायतों के बाद वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण समिति की संयुक्त टीम इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही थी।

40 फीट गहरे कुएं में मिला लेपर्ड का शव

रविवार रात करीब 8 बजे लेपर्ड के फिर से देखे जाने की सूचना मिली। जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पाया गया कि वह सड़क किनारे स्थित एक खुले कुएं में गिर चुका है। कुआं करीब 40 फीट गहरा था, जिसके कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी। जांच के दौरान जब कोई हरकत नहीं मिली, तो यह पुष्टि हुई कि लेपर्ड की मौत हो चुकी है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी विशेषज्ञ टीम

लेपर्ड को कुएं से निकालने के लिए एक विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस दौरान राजस्थान ग्रामीण बैंक के कर्मचारी और वन्यजीव रेस्क्यू विशेषज्ञ पीयूष कांबले कुएं में उतरे और स्थिति का आकलन किया। उनके साथ वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति की टीम भी मौजूद थी। अभियान को पूरी सावधानी के साथ अंजाम दिया गया ताकि किसी प्रकार का जोखिम न हो।

चित्तौड़गढ़ में कुएं में मिला मृत लेपर्ड: दो दिन की तलाश के बाद 40 फीट गहरे कुएं से शव बरामद

दो घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया शव

रेस्क्यू अभियान लगभग दो घंटे तक चला। टीम ने रस्सियों और विशेष उपकरणों की मदद से लेपर्ड के शव को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इस ऑपरेशन में नाथू सिंह, गजराज सिंह सहित कई वन सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों ने अहम भूमिका निभाई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीम ने सफलतापूर्वक अभियान पूरा किया।

शुरुआती जांच में सामने आई वजह

वन विभाग की शुरुआती जांच के अनुसार मृत लेपर्ड नर था और उसकी उम्र लगभग डेढ़ से दो साल के बीच थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह शिकार की तलाश में या भागते समय अंधेरे में खुले कुएं को नहीं देख पाया और उसमें गिर गया। गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

गांव में फैली दहशत और बाद में राहत

लेपर्ड के लगातार मूवमेंट और मवेशियों पर हमलों के कारण अमोलिया गांव में पिछले कई दिनों से डर का माहौल था। ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे और खेतों में अकेले जाना बंद कर दिया था। वन विभाग की टीम लगातार इलाके में निगरानी कर रही थी, लेकिन लेपर्ड बार-बार उनकी पकड़ से बच रहा था। अंततः कुएं में गिरने की घटना ने इस पूरे मामले को खत्म कर दिया।

खुले कुएं पर उठे सवाल

इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और खुले कुओं की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुएं को सुरक्षित ढंग से ढका गया होता, तो शायद इस दुर्लभ वन्यजीव की जान बचाई जा सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे खुले जलस्रोत वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं और इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

वन विभाग की आगे की कार्रवाई

वन विभाग ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का असली कारण क्या था—क्या यह केवल दुर्घटना थी या इसमें अन्य कोई कारण भी शामिल है।

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