Suryakant आज Chandigarh International Arbitration Centre का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले भूटान से लौटते हुए उन्होंने Daily Tribune से बातचीत में कहा कि भारत की न्यायिक व्यवस्था का खास स्थान है और इससे पूरी प्रणाली में अदालतों को महत्वपूर्ण संस्थागत सीख मिलती है।
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा है कि न्यायपालिका की भूमिका केवल फैसले सुनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, पारदर्शिता और नागरिकों के लिए न्याय तक आसान पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह बात Chandigarh International Arbitration Centre (CIAC) के उद्घाटन से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
चंडीगढ़ में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्यक्रम में भाग लेने से पहले मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय न्यायिक व्यवस्था की वैश्विक भूमिका, तकनीक के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
अदालतों की वैधता भरोसे पर टिकी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी न्यायिक प्रणाली की वैधता सिर्फ उसके फैसलों से तय नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका की साख इस बात पर भी निर्भर करती है कि न्यायिक प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और आम नागरिकों के लिए अदालतों तक पहुंच कितनी आसान है। उनके अनुसार, न्यायिक संस्थाओं को समाज के साथ विश्वास का संबंध बनाए रखना जरूरी है। जब नागरिकों को यह भरोसा होता है कि अदालतें निष्पक्ष, पारदर्शी और सुलभ हैं, तभी न्याय व्यवस्था मजबूत होती है।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक प्रणाली में तकनीक के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि तकनीक को सही दृष्टिकोण और व्यापक रणनीति के साथ न्यायिक प्रक्रियाओं में शामिल किया जाए, तो यह न्याय वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से अदालतों को नागरिकों के और करीब लाया जा सकता है। इससे मामलों की सुनवाई की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता मजबूत होगी और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।

वैश्विक न्यायिक सहयोग की जरूरत
सूर्यकांत ने यह भी कहा कि आज के समय में न्यायिक प्रणालियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि भारत की न्यायिक प्रणाली दुनिया के कई देशों के साथ कानूनी अनुभव और संस्थागत ज्ञान साझा करती रही है। चंडीगढ़ में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में लगभग 50 देशों की न्यायिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
इनमें United States, United Kingdom, Singapore, Canada और France जैसे देशों के न्यायिक अधिकारियों और विशेषज्ञों के आने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक न्याय प्रणाली में साझा चुनौतियों पर चर्चा करना है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए सहयोग जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने डिजिटल युग की चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और ये किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहते। उनके अनुसार, साइबर अपराध भौगोलिक सीमाओं का सम्मान नहीं करते, इसलिए इनसे निपटने के लिए देशों की कानूनी और न्यायिक प्रणालियों के बीच सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि वैश्विक स्तर पर न्यायिक संस्थाओं को मिलकर ऐसे सहयोगात्मक ढांचे विकसित करने चाहिए, जो तकनीकी बदलावों के साथ न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाए रख सकें।










