Rajasthan Legislative Assembly में डिस्टर्ब एरिया बिल ध्वनि मत से पास हो गया। शुक्रवार (6 मार्च) की देर रात तक चली बहस के बाद सदन ने इस बिल को मंजूरी दे दी। बिल पास होने के समय Indian National Congress के विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया।
जयपुर: भारत के राज्य Rajasthan में एक महत्वपूर्ण विधायी घटनाक्रम के तहत विधानसभा ने शुक्रवार देर रात ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ से संबंधित एक विवादास्पद विधेयक पारित कर दिया। यह बिल लंबी बहस और राजनीतिक टकराव के बाद ध्वनि मत से पारित हुआ। मतदान से ठीक पहले विपक्षी दल Indian National Congress के विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया।
यह विधेयक आधिकारिक रूप से “The Rajasthan Prohibition of Transfer of Immovable Property and Provision for Protection of Tenants from Eviction from Premises in Disturbed Areas Bill, 2026” के नाम से जाना जाता है। बिल के पारित होने के बाद अब इसे कानून बनने के लिए केवल राज्यपाल की मंजूरी की आवश्यकता है।
क्या है डिस्टर्ब्ड एरिया बिल?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में संपत्ति के लेन-देन को नियंत्रित करना है जिन्हें सरकार ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ के रूप में घोषित करती है। नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति बिना प्रशासनिक अनुमति के संपत्ति खरीद या बेच नहीं सकेगा। बिल के तहत अगर किसी इलाके को डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया जाता है, तो वहां किसी भी अचल संपत्ति (इमूवेबल प्रॉपर्टी) की बिक्री, खरीद या रजिस्ट्री के लिए जिला प्रशासन की अनुमति अनिवार्य होगी।
इसके लिए संबंधित अधिकारी, जैसे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) या उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) की स्वीकृति जरूरी होगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में सामाजिक संतुलन बनाए रखना और किरायेदारों को अचानक बेदखली से बचाना है।

विधानसभा में लंबी बहस
राजस्थान विधानसभा में बिल पर कई घंटों तक बहस चली। विपक्षी दलों ने विधेयक के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए, जबकि सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party (भाजपा) के विधायकों ने इसे आवश्यक और प्रभावी कदम बताया। बहस के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता Govind Singh Dotasra ने विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सदन में कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो इस कानून को समाप्त कर दिया जाएगा।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि यह कानून संभावित रूप से सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है और इसके प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
विपक्ष का वॉकआउट
हालांकि कांग्रेस के विधायकों ने बहस में सक्रिय रूप से भाग लिया, लेकिन जब बिल को पारित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब उन्होंने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर लिया। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक पारदर्शिता और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार इस कानून के माध्यम से कुछ विशेष इलाकों को ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित कर सकती है, जिससे संपत्ति के अधिकारों और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।












