शुक्रवार को बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में रहा। रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक तनाव के चलते सेंसेक्स 770 अंक गिरा जबकि निफ्टी 25,048 पर बंद हुआ।
Closing Bell: शुक्रवार 23 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन निराश किया। शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में तेज़ बिकवाली, रुपये में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक तनाव ने मिलकर बाजार की चाल को नीचे की ओर मोड़ दिया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 770 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 25,048 के स्तर पर बंद हुआ।
वैश्विक संकेतों के बीच सतर्क निवेशक
एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच घरेलू बाजार ने दिन की शुरुआत बढ़त के साथ की थी। हालांकि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव को और गहरा कर दिया।
सेंसेक्स की चाल
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 82,335 के स्तर पर खुला। खुलने के बाद कुछ समय तक उतार-चढ़ाव देखने को मिला लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा बिकवाली हावी होती चली गई। दिन के अंत में सेंसेक्स 769.67 अंक या 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट मुख्य रूप से बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी की वजह से दर्ज की गई।
निफ्टी में भी तेज गिरावट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी सेंसेक्स की राह पर चलता नजर आया। निफ्टी ने दिन की शुरुआत 25,344.60 के स्तर से की लेकिन कारोबार के दौरान यह 25,025 तक फिसल गया। अंत में निफ्टी 241.25 अंक या 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,048 पर बंद हुआ। निफ्टी के ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए जिससे बाजार की व्यापक कमजोरी साफ दिखाई दी।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का दबाव
आज के कारोबार में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। प्राइवेट और सरकारी दोनों ही बैंकों में बिकवाली देखने को मिली। ऊंचे वैल्यूएशन, मुनाफावसूली और आगे की नीतिगत अनिश्चितता ने निवेशकों को इन शेयरों से दूरी बनाए रखने पर मजबूर किया। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जो बाजार की कमजोरी को दर्शाती है।
रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा टूटा
सेक्टोरल स्तर पर देखा जाए तो रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 3.34 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ। इस सेक्टर में इम्प्लीमेंटेशन से जुड़ी देरी और मुनाफावसूली का असर साफ नजर आया। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए रियल्टी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई।
अदाणी ग्रुप के शेयरों का असर
अदाणी ग्रुप के शेयरों में आई गिरावट ने भी बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। अदाणी पोर्ट्स सहित समूह के कई शेयर दबाव में रहे। अमेरिकी नियामक से जुड़े संभावित घटनाक्रमों की खबरों के बीच निवेशकों ने इन शेयरों में सतर्कता बरती जिससे बाजार सेंटीमेंट पर असर पड़ा।
टॉप लूजर्स और गेनर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, इंडिगो और एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचयूएल, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक ने मजबूती दिखाते हुए बढ़त के साथ कारोबार का अंत किया। आईटी शेयरों में सीमित खरीदारी ने गिरते बाजार में थोड़ी राहत जरूर दी लेकिन यह समग्र दबाव को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट पर भी दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.8 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली यह संकेत देती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
एक्सपर्ट की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान और घरेलू पीएमआई आंकड़ों के समर्थन के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली देखने को मिली। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर तक कमजोर होना, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कंपनियों के नतीजों का उम्मीद से थोड़ा कमजोर रहना बाजार की धारणा पर भारी पड़ा।












