बुधवार को भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद लगभग सपाट बंद हुआ। सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली बढ़त दर्ज करने में सफल रहा और निवेशक सतर्क नजर आए।
Closing Bell: बुधवार 11 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार में दिनभर सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला और अंत में बाजार लगभग सपाट रुख के साथ बंद हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत, आईटी शेयरों पर बना दबाव और घरेलू स्तर पर किसी बड़े ट्रिगर की कमी के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
हालांकि ऑटो, फार्मा और PSU बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट जरूर मिला, लेकिन आईटी सेक्टर की कमजोरी ने इस तेजी को सीमित कर दिया। यही वजह रही कि दिन के अंत में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।
सेंसेक्स और निफ्टी का क्लोजिंग हाल
बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स मामूली तेजी के साथ 84,339 अंक पर खुला था। शुरुआती कारोबार में इसमें हल्की मजबूती देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार सीमित दायरे में ही घूमता रहा।
अंत में सेंसेक्स 40.28 अंक या 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,233.64 के स्तर पर बंद हुआ। यह साफ संकेत देता है कि बाजार में न तो खरीदारी का जोरदार उत्साह था और न ही बिकवाली का बड़ा दबाव।
वहीं NSE का निफ्टी-50 भी हरे निशान में खुला और शुरुआती मिनटों में 26,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि यह बढ़त टिक नहीं पाई और दिनभर उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार चलता रहा। अंत में निफ्टी 18.70 अंक या 0.07 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 25,953.85 पर बंद हुआ।
बाजार में सीमित दायरे की वजह क्या रही
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से जुड़ी खबरों के चलते बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस तेजी के बाद अब बाजार कुछ समय के लिए consolidation मोड में आ सकता है।
उनका कहना है कि निवेशक फिलहाल किसी बड़े नए संकेत का इंतजार कर रहे हैं। अब बाजार का फोकस तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों, आने वाले महंगाई आंकड़ों और प्रस्तावित व्यापार समझौते की बारीक शर्तों पर टिक गया है।
नायर के मुताबिक, यह समझौता अंतिम चरण में बताया जा रहा है, लेकिन जब तक इसकी पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक बाजार में बड़ी चाल देखने की संभावना कम है।
ऑटो और हेल्थ सेक्टर में क्यों दिखी मजबूती
बाजार के भीतर सेक्टरों की बात करें तो ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर ने आज बेहतर प्रदर्शन किया। विनोद नायर का कहना है कि इन सेक्टरों में मजबूती बेहतर-से-उम्मीद तिमाही नतीजों को दर्शाती है।
ऑटो सेक्टर में मांग स्थिर बनी हुई है और कई कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहे हैं। वहीं हेल्थकेयर सेक्टर में स्थिर कमाई और मार्जिन में सुधार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
आईटी सेक्टर बना सबसे कमजोर कड़ी
दूसरी ओर आईटी सेक्टर पर लगातार दबाव बना रहा। नायर के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आईटी शेयरों में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा AI से जुड़ी अनिश्चितता और अमेरिका तथा यूरोप में IT spending को लेकर चिंता ने भी इस सेक्टर पर दबाव बढ़ाया है।
आईटी सेक्टर की कमजोरी का असर सीधे बेंचमार्क इंडेक्स पर पड़ा, क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आईटी कंपनियों का वजन काफी अधिक है।
विदेशी निवेशकों से मिला सहारा
एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार देखने को मिल रहा है। नायर के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की खरीदारी फिर से सकारात्मक हो गई है और आने वाले दिनों में इसके जारी रहने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि भारत के GDP growth अनुमान में बढ़ोतरी और बाजार के valuation में आई नरमी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अगर यह रुझान बना रहता है, तो इससे बाजार को मध्यम अवधि में सहारा मिल सकता है।
टॉप गेनर्स और लूजर्स की स्थिति
बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स की कंपनियों में TCS सबसे बड़ा लूजर रहा। इसके शेयर 2.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा Infosys, HCL Tech, ITC, Tech Mahindra, Titan और HDFC Bank के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
वहीं दूसरी तरफ State Bank of India के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। SBI के शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए। इस तेजी के साथ SBI ने मार्केट कैप के मामले में TCS को पीछे छोड़ते हुए देश की चौथी सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी का स्थान हासिल कर लिया। Maruti Suzuki और Trent भी आज के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे।
ब्रॉडर मार्केट का हाल
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित हलचल देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.03 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.02 प्रतिशत ऊपर रहा। इससे साफ है कि बाजार के छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है।
सेक्टोरल इंडेक्स का प्रदर्शन
सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी हेल्थकेयर सबसे मजबूत सेक्टर रहा, जिसमें 1.62 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। इसके उलट निफ्टी आईटी सबसे कमजोर सेक्टर रहा और इसमें 1.76 प्रतिशत की गिरावट आई।
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत
एशियाई बाजारों में बुधवार को सकारात्मक माहौल देखने को मिला। जापान का Nikkei Index मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी हल्की से मध्यम तेजी दर्ज की गई।
यह मजबूती ऐसे समय में देखने को मिली, जब अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में मिला-जुला रुख रहा था। अमेरिका में S&P 500 और Nasdaq में गिरावट दर्ज की गई, जबकि Dow Jones लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड स्तर पर बंद होने में सफल रहा।
अमेरिकी डेटा पर टिकी निवेशकों की नजर
अमेरिकी बाजारों पर दिसंबर के कमजोर retail sales आंकड़ों का असर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ता खर्च में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि बाजार को इसमें सुधार की उम्मीद थी। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के आने वाले labor market data पर टिकी हुई है, जो आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
IPO बाजार में बनी रहेगी हलचल
आईपीओ सेगमेंट में भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मेनबोर्ड सेगमेंट में Fractal Analytics और Aye Finance के इश्यू सब्सक्रिप्शन के आखिरी दिन में प्रवेश कर चुके हैं। वहीं SME सेगमेंट में Grover Jewels और Brandman Retail आज NSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने जा रही हैं।











