खनन चालानों की मंजूरी में देरी के कारण BCCL की कोयला आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं होने पर अगले दो दिनों में प्रतिदिन 25 हजार टन कोयला प्रेषण प्रभावित हो सकता है।
धनबाद: BCCL Coal Supply पर खनन चालानों की मंजूरी में हो रही देरी का असर दिखाई देने लगा है। कंपनी ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि यदि लंबित चालानों का जल्द निपटारा नहीं हुआ तो सड़क और रेल मार्ग से कोयले की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
चालान में देरी से कोयला प्रेषण पर बढ़ा संकट
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में खनन चालानों की मंजूरी में हो रही देरी अब कोयला प्रेषण के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कंपनी के अनुसार, यदि लंबित चालानों को जल्द मंजूरी नहीं मिली तो अगले दो दिनों में प्रतिदिन लगभग 25 हजार टन कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं स्थिति में सुधार नहीं होने पर चार दिनों के भीतर सड़क और रेल मार्ग से होने वाला कोयला डिस्पैच भी पूरी तरह ठप पड़ने की आशंका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए BCCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज कुमार अग्रवाल ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने धनबाद के उपायुक्त से लंबित चालानों की स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया है।
गोविंदपुर साइडिंग में रुकी रैक लोडिंग
कोयला परिवहन पर असर का एक बड़ा कारण गोविंदपुर स्थित एसएलजी साइडिंग में रैक लोडिंग का बंद होना भी है। जिला परिवहन विभाग और खनन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 19 डंपर और कई पेलोडर जब्त किए जाने के बाद इस साइडिंग से कोयले का परिवहन पूरी तरह रुक गया है। इससे पहले से लंबित चालानों की समस्या और अधिक गंभीर हो गई है।
कंपनी का कहना है कि परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण निर्धारित समय पर कोयले की आपूर्ति करना कठिन होता जा रहा है, जिससे औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
कई क्षेत्रों के चालान अब भी लंबित
BCCL के बिक्री विभाग के अनुसार ब्लॉक-दो, लोदना और सिजुआ क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में खनन चालान विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। ब्लॉक-दो क्षेत्र के 10 से 13 जुलाई के बीच जमा किए गए आवेदन अब तक स्वीकृत नहीं हो सके हैं। इसी तरह लोदना क्षेत्र के कई आवेदन जिला खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षक स्तर पर लंबित हैं।
सिजुआ क्षेत्र के 27 जून से 15 जुलाई के बीच जमा किए गए 17 आवेदन भी अभी स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं। इन चालानों के बिना सड़क और रेल मार्ग से कोयले का परिवहन संभव नहीं है, जिससे डिस्पैच व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।
बिजली संयंत्रों की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है असर
BCCL प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा समय में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और यदि कोयले का प्रेषण बाधित रहता है तो बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार तेजी से कम हो सकता है। इसका असर बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों की आपूर्ति पर भी पड़ने की आशंका है।
इसी को देखते हुए कंपनी ने जिला प्रशासन से लंबित खनन चालानों का शीघ्र निपटारा करने का अनुरोध किया है। प्रबंधन का मानना है कि समय पर मंजूरी मिलने से कोयला प्रेषण सामान्य हो जाएगा और बिजली क्षेत्र सहित अन्य प्रमुख उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।








