Mahaprabhu Jagannath: सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, 28 जुलाई के बाद देशभर में रिलीज होगी फिल्म

Mahaprabhu Jagannath Film: सुप्रीम कोर्ट ने ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म की रिलीज को मंजूरी दे दी है। फिल्म 28 जुलाई के बाद देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की देशभर में रिलीज को मंजूरी दे दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि फिल्म की अखिल भारतीय रिलीज 28 जुलाई या उसके बाद ही की जाएगी।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की देशव्यापी रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फिल्म निर्माताओं को राहत देते हुए एक शर्त भी लगाई है कि फिल्म को 28 जुलाई 2026 या उसके बाद ही सिनेमाघरों में रिलीज किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस समय आया है, जब फिल्म को लेकर भगवान जगन्नाथ के चित्रण और धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवाद के बाद इसकी रिलीज पर रोक लगा दी गई थी। 

अदालत ने कहा कि रिलीज की तारीख को आगे बढ़ाने का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी भी संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचना है। इस आदेश के बाद फिल्म निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इससे पहले उड़ीसा हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

क्या है ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म विवाद?

एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को भगवान जगन्नाथ के जीवन और परंपराओं पर आधारित बताया जा रहा है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद कुछ धार्मिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने इसमें भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि फिल्म में धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है। उनका कहना था कि भगवान जगन्नाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं और उनके चित्रण में किसी भी प्रकार की गलती धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने यह आशंका भी जताई थी कि रथ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान फिल्म की रिलीज से विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं और इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

उड़ीसा हाईकोर्ट ने क्यों लगाई थी रोक?

Mahaprabhu Jagannath: सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, 28 जुलाई के बाद देशभर में रिलीज होगी फिल्म

विवाद के बाद मामला उड़ीसा हाईकोर्ट पहुंचा, जहां फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में माना कि भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर विस्तार से विचार करने की जरूरत है। अदालत ने यह भी देखा कि रथ यात्रा के समय धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत का उद्देश्य अंतिम निर्णय आने तक किसी भी संभावित तनाव से बचना और स्थिति को नियंत्रित रखना था।

निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिल्म निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। निर्माताओं की ओर से दलील दी गई कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म भगवान जगन्नाथ की महिमा और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाने के उद्देश्य से बनाई गई है। निर्माताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटाई जाए, ताकि दर्शक इसे देख सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिल्म की रिलीज की अनुमति दे दी, लेकिन समय सीमा तय कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को 28 जुलाई या उसके बाद ही देशभर में रिलीज किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल रिलीज की तारीख को लेकर है। अदालत ने फिल्म के कंटेंट, धार्मिक आपत्तियों या विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। यानी, फिल्म के खिलाफ उठाए गए सवालों पर आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।

रथ यात्रा के बाद रिलीज का फैसला क्यों?

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। ओडिशा के पुरी में होने वाली यह यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक अवसर के दौरान किसी भी विवाद से बचने के लिए फिल्म की रिलीज को कुछ समय के लिए टालना उचित होगा। अदालत का यह कदम धार्मिक आस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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