मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को विपक्षी अभियान से जोड़ने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत भूषण के जरिए संपर्क किया गया, लेकिन CJP प्रतिनिधि राहुल गांधी की बैठक में शामिल नहीं हुए।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को विपक्षी अभियान से जोड़ने की कोशिश की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिए CJP नेतृत्व से संपर्क साधा गया, ताकि संगठन के प्रतिनिधि विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेताओं की बैठक में शामिल हो सकें। यह बैठक कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आवास पर मंगलवार शाम आयोजित हुई थी।
हालांकि, CJP के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुए और वहां संगठन की भागीदारी पर औपचारिक चर्चा भी नहीं हुई। इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक विपक्षी एकजुटता बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत भूषण के जरिए CJP तक पहुंचने की कोशिश
घटनाक्रम से परिचित लोगों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत भूषण ने CJP नेतृत्व को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित विपक्षी नेताओं की बैठक में शामिल कराने की पहल की थी। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में अधिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करना था।
हालांकि, CJP के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण बैठक में संगठन की संभावित भूमिका पर औपचारिक चर्चा नहीं हो सकी। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में कांग्रेस और CJP के बीच इस मुद्दे पर कोई औपचारिक समन्वय स्थापित होगा या नहीं।
यह संपर्क इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस पहले CJP की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाती रही है। पार्टी की ओर से संगठन को आम आदमी पार्टी (AAP) का कथित प्रतिनिधि और एक सक्रियतावादी समूह बताया गया था, न कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल।
चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध में व्यापक भागीदारी चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस नेतृत्व अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में नागरिक समाज संगठनों, छात्र समूहों और अन्य संगठनों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इन प्रदर्शनों का संबंध मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों से है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों और प्रक्रिया की वैधता को लेकर उठाए गए सवालों का आकलन संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
कांग्रेस की रणनीति से संकेत मिलता है कि पार्टी विरोध को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित रखने के बजाय छात्र संगठनों और अन्य समूहों को भी इसमें शामिल करना चाहती है।
राहुल गांधी बोले- सभी विरोध प्रदर्शन एक हैं
सोमवार को राहुल गांधी ने विपक्ष के प्रदर्शनों, छात्रों के आंदोलनों और CJP के विरोध को एक व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "सभी विरोध प्रदर्शन एक हैं। कोई समानांतर विरोध प्रदर्शन नहीं है। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं।"
उनकी टिप्पणी को अलग-अलग समूहों के बीच समन्वय बढ़ाने और राजनीतिक असहमति के साझा मुद्दों पर एकजुटता दिखाने के संकेत के रूप में देखा गया।
राहुल गांधी के इस रुख से कांग्रेस की ओर से CJP जैसे समूहों के साथ संवाद की संभावना बढ़ती दिखाई देती है। हालांकि, किसी बैठक में शामिल होने के लिए संपर्क करना और औपचारिक राजनीतिक गठबंधन बनाना दो अलग-अलग बातें हैं।
CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर कथित सुरक्षा उल्लंघन के मामले में हिरासत में लिए जाने के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
राहुल गांधी ने बुधवार को इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध नहीं होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA ब्लॉक के सदस्य अलग-अलग बैनरों के तहत विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनके बीच संवैधानिक अधिकारों को लेकर साझा चिंता है।
उन्होंने जंतर-मंतर को भारत के लोगों का विरोध स्थल बताते हुए कहा कि विपक्ष इसे फिर से हासिल करने की कोशिश करेगा।
हालांकि, CJP नेताओं के मामले में लगाए गए आरोपों, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और न्यायिक हिरासत के आधार को समझने के लिए संबंधित कानूनी दस्तावेजों और अधिकारियों के पक्ष को भी देखना जरूरी है।
TMC, AAP और वाम दलों के साथ भी संपर्क का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क किया था।
इसके बाद संबंधित नेता ने अन्य विपक्षी दलों के साथ समन्वय किया, ताकि कार्रवाई की संयुक्त रूप से आलोचना की जा सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस के पहले के संदेह के बावजूद TMC, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के साथ CJP का नियमित संपर्क रहा है। इन दलों के बीच समर्थन और समन्वय की कोशिशों की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, इन संपर्कों को औपचारिक गठबंधन या साझा राजनीतिक मंच का दर्जा देना अभी उचित नहीं होगा। इसके लिए संबंधित दलों की आधिकारिक घोषणाएं और भविष्य की संयुक्त गतिविधियां महत्वपूर्ण होंगी।
कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत?
कांग्रेस की ओर से CJP को बैठक में शामिल कराने की कोशिश को संगठन के प्रति उसके दृष्टिकोण में संभावित बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। पहले जहां पार्टी CJP की राजनीतिक पहचान और उसकी भूमिका पर सवाल उठाती रही थी, वहीं अब चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध को व्यापक बनाने के लिए उससे संपर्क करने की कोशिश की खबर सामने आई है। इसका एक कारण विपक्षी दलों की यह रणनीति हो सकती है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर अधिक से अधिक समूहों को साथ लाया जाए।
फिर भी, CJP प्रतिनिधियों का राहुल गांधी की बैठक में शामिल नहीं होना बताता है कि संपर्क की पहल अभी औपचारिक भागीदारी में नहीं बदली है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संगठन भविष्य में कांग्रेस या INDIA ब्लॉक के साथ किसी साझा कार्यक्रम में हिस्सा लेगा या नहीं।
SIR विवाद और विपक्षी राजनीति पर क्या होगा असर?
SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
विपक्षी दलों के लिए अलग-अलग संगठनों को साथ लाना आंदोलन का दायरा बढ़ाने और सार्वजनिक समर्थन जुटाने का एक तरीका हो सकता है। वहीं, विभिन्न समूहों के बीच राजनीतिक मतभेद और संगठनात्मक स्वतंत्रता ऐसे समन्वय को चुनौती भी दे सकते हैं।
कांग्रेस की CJP तक पहुंचने की कोशिश इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। लेकिन फिलहाल इसे औपचारिक गठबंधन की घोषणा के बजाय संपर्क और संभावित समन्वय की पहल के रूप में देखना अधिक सटीक होगा। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि CJP और कांग्रेस के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं, अन्य विपक्षी दल किस तरह की भूमिका निभाते हैं और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन किस दिशा में जाते हैं।










