फिलिपींस में पकड़े गए साइबर फ्रॉड गिरोह के दस्तावेज़ ने उजागर किया कि अपराधी “पिग-बुचरिंग” जैसी रणनीति से शिकार को केवल सात दिन में भावनात्मक रूप से तैयार कर फर्जी निवेश करवा लेते हैं। AI और नकली प्रोफाइल का इस्तेमाल ठगी की विश्वसनीयता बढ़ाता है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड और खतरनाक हो गया है।
New Strategy Of Cyber Fraud: फिलिपींस में पुलिस की छापेमारी के दौरान एक साइबर फ्रॉड गिरोह का मैनुअल बरामद हुआ, जिसमें बताया गया कि कैसे शिकार को सात दिन में भावनात्मक रूप से तैयार कर फर्जी निवेश करवा लिया जाता है। इस दस्तावेज़ में नकली पहचान, रोमांस स्कैम और AI टूल्स का इस्तेमाल कर ऑनलाइन फ्रॉड को और खतरनाक बनाने की पूरी रणनीति साझा की गई थी। गिरोह की योजना शिकार की कमजोरियों का फायदा उठाकर तेजी से पैसा ऐंठने पर केंद्रित थी।
साइबर फ्रॉड की खतरनाक रणनीति
फिलिपींस में पुलिस की छापेमारी के दौरान साइबर फ्रॉड गिरोह के ठिकाने से एक दस्तावेज बरामद हुआ, जिसमें विस्तार से बताया गया था कि किसी व्यक्ति को कैसे भावनात्मक रूप से तैयार किया जाए और फिर उससे पैसा ऐंठा जाए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मैनुअल चीनी भाषा में था और ठगी को सेल तथा पीड़ित को क्लाइंट कहा गया। दस्तावेज़ में स्पष्ट लिखा था कि जब भावनाएं नियंत्रित हो जाती हैं तो पैसा अपने आप आ जाता है।
एक दूसरा दस्तावेज रोमांस स्कैम पर केंद्रित था। इसमें अपराधियों को सिखाया गया कि किसी को प्रेम संबंध का भरोसा दिलाकर फर्जी निवेश में पैसा लगवाया जाए। इस तरह की ठगी को गिरोह “पिग-बुचरिंग” कहते हैं, यानी शिकार को धीरे-धीरे तैयार करना और फिर अचानक पूरी राशि ऐंठ लेना।

नकली पहचान से शुरू होती है ठगी
मैनुअल में बताया गया कि हर पिग-बुचरिंग स्कैम की शुरुआत एक भरोसेमंद नकली पहचान बनाने से होती है। ठग खुद को डॉक्टर, वकील, इंजीनियर या किसी बड़ी कंपनी का मैनेजर बताकर शिकार का भरोसा जीतते हैं। महिला शिकार के लिए अक्सर सुरक्षा और अधिकार का भ्रम पैदा किया जाता है।
मैनुअल के अनुसार, नकली प्रोफाइल के लिए जन्मदिन, पेशा और परिवार की कहानी जैसी बातें हमेशा एक जैसी रखी जाती हैं। इसके बाद उम्र, रहन-सहन और पारिवारिक बैकग्राउंड जैसी जानकारी शिकार के अनुरूप बदल दी जाती है। छोटे-छोटे विवरण जैसे शौक, घर, कार और पसंदीदा गतिविधियां इस नकली कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।
भावनात्मक जाल और सात दिन की ठगी
पहले दिन ठग साधारण मैसेज भेजकर शिकार की रुचि और संवेदनशीलता को परखते हैं। इसके बाद फोन कॉल या वीडियो चैट के जरिए भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया जाता है। मैनुअल में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक शिकार अलग होता है। किसी को तारीफों से, किसी को अकेलेपन की सहानुभूति देकर और किसी को हल्के मज़ाक से पास लाया जाता है।
ठग शिकार की कमजोरियों को भी पहचानते हैं, जैसे बचपन में लाड़-प्यार मिला या नहीं, आत्मविश्वास का स्तर और मानसिक संवेदनशीलताएं। मैनुअल के अनुसार, पूरे खेल को सात दिनों में अंजाम दिया जाता है। दूसरे दिन निवेश का प्रस्ताव, पांचवें दिन प्रेम संबंध और सातवें दिन फर्जी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगवाया जाता है। यदि शिकार जल्दी भावनात्मक रूप से जुड़ता नहीं, तो उन्हें छोड़कर अगले लक्ष्य पर बढ़ने की सलाह दी जाती है।
AI और टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई खतरनाकियाँ
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इन घोटालों को और खतरनाक बना दिया है। अब ठग फर्जी फोटो, नकली वीडियो कॉल, ऑटोमैटिक चैट और रियल-टाइम भाषा अनुकूलन जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर शिकार को वास्तविक अनुभव जैसा महसूस कराते हैं। ये उपकरण ठगी की विश्वसनीयता और असर को कई गुना बढ़ा देते हैं।











