दरभंगा में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मंगलवार को बहादुरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) आनंद कुमार विभूति से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। जांच एजेंसी को अधिकारी के पास उनकी ज्ञात आय के मुकाबले करीब 1.70 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति होने का आरोप है। छापेमारी शुरू होते ही इलाके में हलचल मच गई और आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई की भनक लगने के बाद BDO मौके से फरार हो गए।
EOU की अलग-अलग टीमें मंगलवार सुबह एक साथ कई स्थानों पर पहुंचीं और संबंधित ठिकानों की तलाशी शुरू की। जांच के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात खंगाले। आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी ने अपने सेवा काल के दौरान ज्ञात और वैध आय के मुकाबले कितनी अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की और यह संपत्ति किन माध्यमों से बनाई गई।
आनंद कुमार विभूति वर्तमान में दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड में BDO के पद पर तैनात हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब दो महीने पहले ही उनका तबादला मुजफ्फरपुर से दरभंगा हुआ था। इसके बाद उन्होंने बहादुरपुर में पदभार संभाला। अब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप में EOU की यह कार्रवाई सामने आई है।
EOU की रेड के दौरान टीमों ने संबंधित ठिकानों पर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। इस तरह की कार्रवाई में अधिकारियों की संपत्ति, बैंक खातों, जमीन-मकान से जुड़े कागजात, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जाती है, ताकि वास्तविक आय और अर्जित संपत्ति के बीच अंतर का आकलन किया जा सके।
मामले में सबसे अहम आरोप करीब 1.70 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का है। हालांकि, यह राशि जांच के दौरान सामने आए प्रारंभिक आरोपों से जुड़ी है। संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन और उसके वैध या अवैध होने की स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल EOU ने तलाशी के जरिए दस्तावेज और दूसरे साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
रिपोर्ट के अनुसार छापेमारी की जानकारी मिलने के बाद BDO आनंद कुमार विभूति मौके से फरार हो गए। उनके फरार होने की बात सामने आने के बाद मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि, उनके मौके पर मौजूद नहीं होने की परिस्थितियों और उनके फरार होने के कारणों को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
EOU की कार्रवाई के दौरान आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी रखी गई। आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी आमतौर पर एक साथ कई स्थानों पर तलाशी लेकर संबंधित अधिकारी की संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों का मिलान करती है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किसी अधिकारी ने अपने नाम के अलावा परिवार या अन्य लोगों के नाम पर तो संपत्ति अर्जित नहीं की है।
दरभंगा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर बहादुरपुर के BDO पद का उल्लेख भी मौजूद है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर बहादुरपुर BDO कार्यालय का संपर्क विवरण उपलब्ध है।
बिहार में पिछले कुछ समय से EOU की ओर से आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों में अधिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। अगस्त 2026 में बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के उप निदेशक अजय कुमार सिंह के पटना और बेगूसराय स्थित तीन ठिकानों पर EOU ने छापेमारी की थी। उस मामले में एजेंसी ने करीब 3.44 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।
इससे पहले जून 2026 में भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के बिहार और दिल्ली-NCR स्थित छह ठिकानों पर भी EOU की कार्रवाई हुई थी। उस मामले में जांच एजेंसी ने करीब 3.89 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिलने का दावा किया था।
दरभंगा में भी EOU की कार्रवाई इससे पहले सामने आती रही है। मार्च 2026 में बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में EOU ने छापेमारी की थी। उस कार्रवाई में कई दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी और दरभंगा के साथ मधुबनी तथा जयनगर में भी तलाशी की गई थी।
अब बहादुरपुर BDO के मामले में EOU की जांच कई बिंदुओं पर आगे बढ़ सकती है। टीम यह देखेगी कि अधिकारी की सरकारी सेवा से प्राप्त आय कितनी रही, उनके नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति है और बैंकिंग एवं निवेश से जुड़े रिकॉर्ड में क्या जानकारी सामने आती है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों या संबंधित लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच की जा सकती है।
जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेज इस तरह की जांच में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। EOU यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि संबंधित संपत्तियां कब खरीदी गईं, उनकी कीमत कितनी थी और भुगतान किस माध्यम से किया गया। बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से भी लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सकती है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी आमतौर पर अधिकारी की कुल ज्ञात आय और उसके मुकाबले अर्जित संपत्ति का आकलन करती है। इसमें वेतन, वैध निवेश, पारिवारिक आय और अन्य घोषित स्रोतों को भी ध्यान में रखा जाता है। इसके बाद संपत्ति और आय के बीच अंतर का हिसाब लगाया जाता है। इसलिए छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल EOU की टीम पांच ठिकानों पर तलाशी कार्रवाई कर रही है। तलाशी के दौरान क्या-क्या मिला, कितनी नकदी या संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए और अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी में कितनी संपत्ति का उल्लेख है, इसकी विस्तृत जानकारी जांच एजेंसी की ओर से सामने आना बाकी है।
मामला आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर होगी। केवल छापेमारी में किसी संपत्ति या दस्तावेज के मिलने से उसे अवैध संपत्ति नहीं माना जा सकता। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित संपत्तियों का स्रोत क्या है और क्या वे अधिकारी की ज्ञात आय के अनुपात में हैं।
फिलहाल इस कार्रवाई ने दरभंगा के प्रशासनिक और सरकारी महकमे में हलचल बढ़ा दी है। बहादुरपुर BDO के खिलाफ EOU की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बिहार में आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है। अब इस मामले में छापेमारी के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और जांच की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।









