देश के रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार दोगुना बढ़ा। एयरोस्पेस, साइबर, C4ISR, समुद्री और लैंड सिस्टम में विशेषज्ञों की मांग तेज़ है। सैलरी में 30% तक वृद्धि से यह क्षेत्र युवाओं के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है।
Defence Jobs: देश के रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में रोजगार के अवसर दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं। सीआईईएल एचआर के एक अध्ययन के अनुसार, 2022 में इस क्षेत्र में लगभग 3,500 लोगों को नियुक्त किया गया था। वहीं, वर्तमान अवधि में यह संख्या लगभग 7,000 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रक्षा क्षेत्र में नौकरी के अवसर केवल अल्पकालिक या अस्थायी नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी स्वरूप में लगातार बढ़ रहे हैं।
भर्तियों में लगातार वृद्धि का रुझान
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में भर्तियों की यह वृद्धि अचानक नहीं हुई है। सालाना आधार पर लगातार बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि देश में रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण से जुड़े कार्यक्रम मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही यह क्षेत्र तकनीकी विशेषज्ञों और कुशल पेशेवरों के लिए आकर्षक बन गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि लगभग 60 फीसदी कुशल पेशेवरों की मांग रडार सिस्टम, RF Engineering और सुरक्षित संचार (Secure Communication) तकनीकों से जुड़ी है।
सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उच्च तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ने के साथ-साथ उनके मेहनताना में भी वृद्धि हुई है। अध्ययन के अनुसार, 2022 की तुलना में आज इन पेशेवरों की सैलरी लगभग 30 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यह संकेत देता है कि इस क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञों को आकर्षक और प्रतिस्पर्धी पैकेज दिया जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए यह रोजगार का एक लाभकारी विकल्प बन गया है।
एयर सिस्टम में बढ़ते अवसर
रक्षा प्रौद्योगिकी में सबसे अधिक नौकरियां एयरोस्पेस और एयर सिस्टम क्षेत्र में हैं। अध्ययन के अनुसार, कुल नौकरियों का लगभग एक तिहाई हिस्सा इस क्षेत्र में निकल रहा है। इसका मुख्य कारण है स्वदेशी लड़ाकू कार्यक्रमों, विमानों के उन्नयन और एविओनिक्स यानी विमान इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी। एयरोस्पेस सेक्टर में तकनीकी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है और इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका
रक्षा क्षेत्र में केवल एयर सिस्टम तक ही रोजगार सीमित नहीं है। साइबर सुरक्षा, C4ISR (Command, Control, Communications, Computers, Intelligence, Surveillance & Reconnaissance), इलेक्ट्रॉनिक युद्धक सामग्री और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भी कुशल पेशेवरों की मांग बढ़ी है। अध्ययन के अनुसार, इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी कुल पेशेवर मांग का 26 फीसदी है। इससे स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध और रक्षा कार्यक्रमों में तकनीकी विशेषज्ञता की अहमियत बढ़ गई है।
नौसेना और समुद्री प्रणाली में रोजगार
नौसेना और समुद्री तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी कुशल पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नौसेना और समुद्री प्रणाली से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की मांग कुल पेशेवर मांग का 19 फीसदी है। यह क्षेत्र भी रोजगार के लिए आकर्षक बनता जा रहा है, खासकर जहाज निर्माण, समुद्री निगरानी और समुद्री इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी में।
भूमि आधारित रक्षा तकनीकों और मानवरहित प्लेटफॉर्म (Unmanned Platforms) के क्षेत्र में भी पेशेवरों की मांग निरंतर बनी हुई है। लैंड सिस्टम से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों की हिस्सेदारी कुल मांग का 14 फीसदी है, जबकि ड्रोन और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म से जुड़ी भूमिकाओं में कुशल पेशेवरों की मांग कुल 10 फीसदी है। यह दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध में टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
आंतरिक विकास
रक्षा संगठनों ने विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आंतरिक स्तर पर कर्मचारियों को आगे बढ़ाने और जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति अपनाई है। अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 20-25 फीसदी रक्षा संगठन मिशन-क्रिटिकल टेक्निकल और प्रोग्राम लीडरशिप पदों को आंतरिक उत्तराधिकार योजना के माध्यम से भरते हैं। इस रणनीति से संगठन में कुशलता और लंबी अवधि तक निरंतरता बनी रहती है।
रक्षा रोजगार में संरचनात्मक बदलाव
सीआईईएल एचआर के प्रबंध निदेशक और CEO आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन अब इस क्षेत्र में रोजगार की प्रकृति में संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है। युद्ध में तेजी से तकनीक के इस्तेमाल के कारण उच्च तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। रडार, RF और सुरक्षित संचार अब बुनियादी कौशल माने जा रहे हैं।
एयरोस्पेस क्षेत्र में रोजगार के अवसर
एयरोस्पेस क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बन रहे हैं। विमान उन्नयन, विमानों के इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। यह क्षेत्र अब न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक और विश्वसनीय रोजगार का स्रोत बन गया है।









