राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन किया है।
मुंबई: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले के हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने प्रस्तावित संविधान संशोधन का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए निष्पक्ष और समान होनी चाहिए।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान को सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सुप्रिया सुले और पार्टी प्रमुख शरद पवार दोनों ने अब तक यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी किसी भी संवैधानिक प्रस्ताव पर अपना रुख उसके प्रावधानों के आधार पर तय करेगी, न कि राजनीतिक गठबंधन बदलने के आधार पर।
क्या है प्रस्तावित परिसीमन का मुद्दा?
भारत में परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना होता है, ताकि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और नए परिसीमन की संभावना को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक अंतिम विधायी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और प्रस्ताव के स्वरूप पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि भविष्य में लोकसभा की कुल सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि सीटों की अंतिम संख्या, परिसीमन आयोग की सिफारिशों और संसद द्वारा पारित कानून पर निर्भर करेगी।
सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
सुप्रिया सुले ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने के विचार का उनकी पार्टी सिद्धांततः समर्थन करती है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर सीटों की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, संतुलित और सभी राज्यों के लिए समान होनी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी राज्य के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

शरद पवार ने भी दोहराई समानता की मांग
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रभावी कार्य किया है, उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि दक्षिण भारत सहित उन राज्यों के साथ न्याय होना चाहिए, जिन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है। उनके अनुसार, केवल अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व देना और जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों की सीटों पर प्रतिकूल प्रभाव डालना संतुलित संघीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगा।
क्या INDIA गठबंधन में मतभेद बढ़ेंगे?
सुप्रिया सुले के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या विपक्षी INDIA गठबंधन के भीतर परिसीमन के मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ सकती है। हालांकि अब तक एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने गठबंधन से अलग होने या एनडीए में शामिल होने जैसा कोई संकेत नहीं दिया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी संवैधानिक संशोधन का समर्थन करना और किसी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनना, दोनों अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में मौजूदा बयान को गठबंधन बदलने के संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
यदि भविष्य में नया परिसीमन लागू होता है, तो महाराष्ट्र सहित कई राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव संभव है। हालांकि यह पूरी तरह आगामी जनगणना के आंकड़ों, परिसीमन आयोग की सिफारिशों और संसद की मंजूरी पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि महाराष्ट्र को कितनी अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं या वर्तमान संसदीय क्षेत्रों में किस प्रकार के बदलाव होंगे। इसलिए इस संबंध में किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।










