देश में एलपीजी कमी पर शशि थरूर का बयान: बोले- 'देश को एकजुट रहकर समस्या का समाधान करना होगा'

देश में बढ़ती LPG कमी पर शशि थरूर ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश को मिलकर समस्या का हल ढूंढना होगा। पढ़ें उनके बयान और सरकार की प्रतिक्रिया।

देशभर में एलपीजी गैस की कमी को लेकर बढ़ती खबरों ने सियासी और आम जनता दोनों के बीच चिंता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने शुक्रवार को अपनी प्रतिक्रिया दी। 

नई दिल्ली: देशभर में एलपीजी गैस की कमी को लेकर सियासत तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच इस मुद्दे की गूंज शुक्रवार को संसद तक सुनाई दी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मंत्रालय के बयान के अनुसार पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की सप्लाई पर्याप्त है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि एलपीजी की सप्लाई में कुछ कमी आ रही है।

थरूर ने विशेष रूप से इस कमी का असर ग्रामीण इलाकों पर अधिक पड़ने की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या से आम नागरिकों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं और सरकार को समय रहते इस पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

ग्रामीण इलाकों में समस्या बढ़ी

थरूर ने बताया कि एलपीजी की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग अब लकड़ी और कोयले की जगह गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करने लगे हैं। जब सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह उनके लिए गंभीर समस्या बन जाती है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में देशवासियों को एकजुट होकर इस चुनौती का समाधान निकालना होगा। सरकार को तुरंत कदम उठाकर सिलेंडरों की सप्लाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।”

थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि एलपीजी जैसी बुनियादी वस्तु की कमी को राजनीतिक मुद्दा बनाने की बजाय सभी पक्षों को मिलकर समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि देश के लिए एकजुटता और जिम्मेदारी की भावना इस संकट का सबसे बड़ा समाधान हो सकती है।

पश्चिम एशिया संकट पर थरूर की राय

एलपीजी कमी की समस्या के अलावा शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमला करना गलत था। उनके अनुसार उस समय बातचीत जारी थी और ईरान कई मांगों को मानने के लिए तैयार दिखाई दे रहा था। ऐसे हालात में हमला अनुचित और समय के हिसाब से असंवेदनशील था।

हालांकि, थरूर ने यह भी कहा कि ईरान पूरी तरह निर्दोष नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरान ने ऐसे देशों पर हमले किए जिनका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था, जिससे निर्दोष लोग प्रभावित हुए। इस संघर्ष में दो-तीन भारतीय नागरिकों की भी मौत हुई, जबकि उनका इस युद्ध से कोई संबंध नहीं था।

भारत की भूमिका पर थरूर का दृष्टिकोण

थरूर ने भारत की विदेश नीति और कूटनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान भारत को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से बातचीत कर रहे हैं। थरूर के अनुसार, भारत केवल घटनाओं को देखते रहने के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को तेज करे, ताकि नागरिक सुरक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखा जा सके।

थरूर ने कहा, “हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि भारतीय नागरिक और व्यापारिक हित प्रभावित न हों। एलपीजी की कमी और पश्चिम एशिया संकट जैसी समस्याओं को मिलकर सुलझाना हमारी जिम्मेदारी है।

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