पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। चर्चा में द्विपक्षीय संबंध, BRICS मुद्दे और Strait of Hormuz की सुरक्षा शामिल रही।
World News: पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर अहम बातचीत हुई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर चर्चा हुई, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के साथ साथ BRICS से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की गई।
डॉ एस जयशंकर ने इस वार्ता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है और दुनिया भर के देश इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
द्विपक्षीय संबंधों और BRICS मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी पोस्ट में बताया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ उनकी यह एक और महत्वपूर्ण बातचीत थी, जिसमें भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर विचार किया गया। इसके साथ ही BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत राजनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं।
ऊर्जा व्यापार, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के कई प्रोजेक्ट दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। ऐसे में वर्तमान संकट के बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच लगातार संवाद होना यह दिखाता है कि दोनों देश आपसी सहयोग और समझ को बनाए रखना चाहते हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई बातचीत
जयशंकर और अराघची के बीच यह बातचीत उस समय हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की गई थी, जिसके जवाब में ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है। इस वजह से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर खतरा बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में से एक है और उसकी बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है। अगर इस समुद्री मार्ग में किसी तरह की बाधा आती है तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से भारत इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय संवाद कर रहा है।
पहले भी कई बार हो चुकी है बातचीत
डॉ एस जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच हाल के दिनों में यह चौथी प्रमुख बातचीत मानी जा रही है। इससे पहले फरवरी 28, मार्च 5 और मार्च 10 को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर वार्ता हो चुकी है। उन चर्चाओं में मुख्य रूप से क्षेत्रीय संघर्ष, शिपिंग सुरक्षा और भारतीय जहाजों तथा टैंकरों के सुरक्षित मार्ग पर फोकस किया गया था।
ईरान का रुख
इन वार्ताओं के दौरान ईरान की ओर से भी अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है। ईरानी पक्ष ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों को आक्रामक बताया और कहा कि ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है। ईरान का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। इसके साथ ही ईरान ने BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समर्थन की उम्मीद जताई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और कई महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है। तेल की कीमतों में वृद्धि से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस तनाव के कारण प्रभावित हो रहे हैं और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में दुनिया भर के देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
भारत की संतुलित कूटनीति
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है। एक ओर भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर इजरायल के साथ भी मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। इसलिए भारत की कोशिश यही रहती है कि वह दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित रखते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा दे।
ईरान के साथ भारत के संबंध चाबहार पोर्ट, ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर आधारित हैं। यही कारण है कि संकट के समय भी दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर संपर्क बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।









