एआई और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच भारत डेटा सेंटर निवेश का नया केंद्र बन रहा है। टर्नर एंड टाउनसेंड की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में डेटा सेंटर निर्माण की लागत दुनिया में दूसरी सबसे कम है। सिंगापुर और ज्यूरिख की तुलना में यहां लागत लगभग आधी है, जिससे भारत निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार बन गया है।
India Data Center Market Growth 2025: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विस्तार के साथ भारत तेजी से डेटा सेंटर निवेश का हब बनता जा रहा है। टर्नर एंड टाउनसेंड की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया कि मुंबई में प्रति वॉट डेटा सेंटर निर्माण की लागत केवल 6.64 डॉलर (करीब 590 रुपये) है, जो दुनिया में दूसरी सबसे कम है। सस्ती बिजली, कम निर्माण लागत और तेजी से बढ़ते डिजिटल डेटा के कारण भारत वैश्विक कंपनियों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बन गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि देश में अभी कुल वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता का सिर्फ 3 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है, जिससे आगे निवेश की बड़ी संभावनाएं दिखती हैं।
भारत में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट बताती है कि AI कंपनियों के लिए डेटा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर अब रणनीतिक संपत्ति बन गया है, और इसी वजह से भारत निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहर अब डेटा सेंटर निर्माण के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं। कम निर्माण लागत, उपलब्ध भूमि और तुलनात्मक रूप से सस्ती बिजली भारत को अन्य एशियाई देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाती है।

भारत में सिर्फ 3% डेटा सेंटर क्षमता
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत डेटा उत्पन्न करता है, लेकिन देश की कुल डेटा सेंटर कैपेसिटी केवल 3 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि भारत में डेटा का उत्पादन तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी सीमित है।
इस स्थिति के चलते देश को अभी विदेशी डेटा सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, यही अंतर भारत के लिए भारी संभावनाएं भी खोलता है — आने वाले वर्षों में यहां सैकड़ों नए डेटा सेंटर बनने की संभावना है, खासकर AI और क्लाउड-आधारित स्टार्टअप्स की बढ़ती मांग के चलते।
कम लागत, लेकिन निवेश और सप्लाई चेन बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर निर्माण के लिए भारी निवेश की जरूरत है। पावर सप्लाई, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन की सीमाएं अब भी प्रमुख बाधा बनी हुई हैं। हालांकि, कम निर्माण लागत और बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी इसे एक आकर्षक मार्केट बना रही है।
वैश्विक स्तर पर भी डेटा सेंटर निर्माण की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि 52 प्रमुख बाजारों में निर्माण लागत औसतन 5.5 प्रतिशत बढ़ी है। भारत की तुलना में विकसित देशों में लागत और ऊर्जा खर्च कहीं ज्यादा हैं।











