दिल्ली मालवीय नगर अग्निकांड: बांग्लादेशी पीड़िता का गंभीर आरोप, शव भेजने के नाम पर ₹1.8 लाख वसूली का दावा

दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड की पीड़िता ने शव भेजने के नाम पर ₹1.8 लाख वसूली का आरोप लगाया। दूतावास पर मुफ्त व्यवस्था के वादे के बाद भी पैसे लेने का दावा।

दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड की पीड़िता शमिया चौधरी ने आरोप लगाया कि शवों को बांग्लादेश भेजने के लिए दूतावास ने ₹1.8 लाख लिए, जबकि पहले इसे मुफ्त बताया गया था। मामले की जांच और सवाल उठ रहे हैं।

नई दिल्ली: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। इस हादसे में जीवित बचीं एक बांग्लादेशी नागरिक शमिया चौधरी ने आरोप लगाया है कि मृतकों के शवों को बांग्लादेश भेजने के नाम पर उनसे ₹1.8 लाख की वसूली की गई, जबकि पहले इसे सरकारी व्यवस्था के तहत मुफ्त में भेजने का आश्वासन दिया गया था।

यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि इसमें दूतावास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

पीड़िता का आरोप – “मुफ्त में शव भेजने का वादा था, लेकिन पैसे लिए गए”

पीड़िता शमिया चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें बताया गया था कि मृतकों के शवों को बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होगी, लेकिन बाद में उनसे भारी रकम वसूली गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि दूतावास स्तर पर उनसे ₹1.8 लाख जमा करने को कहा गया। शमिया के अनुसार, “हमें कहा गया था कि शव मुफ्त भेजे जाएंगे, लेकिन बाद में पैसे मांगे गए। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि जब सरकार ने मुफ्त सुविधा का वादा किया था तो पैसे क्यों लिए गए।” इस बयान के बाद मामले की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

हादसे के समय की दर्दनाक यादें

शमिया चौधरी ने उस भयावह सुबह को याद करते हुए बताया कि आग लगने के समय वह होटल की तीसरी मंजिल पर कमरे नंबर 302 में मौजूद थीं। कमरे में उनके साथ कुल पांच लोग थे।

उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8 बजे अचानक आग लग गई और देखते ही देखते धुआं पूरे भवन में फैल गया। शमिया के अनुसार, उस समय उन्हें लगा कि वह शायद जिंदा बाहर नहीं निकल पाएंगी।

उनके शब्दों में, “मुझे लगा कि मेरी जिंदगी खत्म होने वाली है। हर तरफ धुआं और आग थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था।”

बचाव और राहत कार्य में स्थानीय लोगों की भूमिका

हादसे के दौरान कई स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों ने जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ लोगों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ को स्थानीय नागरिकों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

राहत कार्य में शामिल एक स्थानीय व्यक्ति रियाजुद्दीन मंसूरी ने अपनी दुकान के गद्दे बाहर लाकर नीचे बिछा दिए, ताकि लोग ऊपर से कूदकर अपनी जान बचा सकें। उनकी इस पहल से कई लोगों की जान बचने की बात सामने आई है।

प्रशासन और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद दिल्ली सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। राजधानी की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने मालवीय नगर अग्निकांड और साकेत के एक अन्य भवन हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।

इसके साथ ही बचाव कार्य में शामिल पुलिसकर्मियों, नागरिकों और राहतकर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सरकार ने कहा कि ऐसे मामलों में बचाव कार्य में लगे लोगों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

होटल संचालन पर गंभीर सवाल

जांच में सामने आया है कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, वह B&B (बेड एंड ब्रेकफास्ट) के रूप में केवल 6 कमरों के लिए अधिकृत था, लेकिन वहां करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भवन में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया था। यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में कमरे बिना उचित लाइसेंस के कैसे चल रहे थे।

अग्निकांड की प्रमुख वजहें

प्रारंभिक जांच में कई गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आई हैं: भवन में वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। केवल एक ही निकास मार्ग उपलब्ध था, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहे थे।  इन सभी कारणों ने आग को और अधिक घातक बना दिया, जिससे लोग समय पर बाहर नहीं निकल पाए।

23 लोगों की मौत, जांच जारी

इस भीषण अग्निकांड में अब तक 23 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई अन्य लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच जारी है और भवन के संचालन नियमों की भी समीक्षा की जा रही है।

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