चिनाब-ब्यास सुरंग परियोजना को मिली रफ्तार, हिमाचल में बनेगी 432 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना

हिमाचल में चिनाब-ब्यास सुरंग परियोजना को गति मिली है। चंद्रा नदी के जल से 432 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी।

केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास सुरंग परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। परियोजना के तहत चंद्रा नदी के जल का उपयोग कर 432 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अत्याधुनिक सुरंग और भूमिगत पावर हाउस विकसित किया जाएगा।

शिमला: हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति और मनाली क्षेत्र में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास सुरंग परियोजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना के तहत चंद्रा नदी के जल संसाधनों का उपयोग कर 432 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना को ऊर्जा उत्पादन, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिमालयी क्षेत्र में विकसित होगी बड़ी जलविद्युत परियोजना

चिनाब-ब्यास सुरंग परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति और कुल्लू जिलों को जोड़ने वाले क्षेत्र में विकसित की जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना है।

योजना के तहत चंद्रा नदी पर एक बैराज का निर्माण किया जाएगा, जहां से पानी को सुरंग के माध्यम से दूसरे हिस्से तक पहुंचाया जाएगा। इस जल प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। परियोजना पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी और इसमें भूमिगत संरचनाओं का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

432 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

प्रस्तावित पावर हाउस भूमिगत बनाया जाएगा, जिसमें 108-108 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां स्थापित की जाएंगी। कुल मिलाकर परियोजना से 432 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की जलविद्युत क्षमता को और मजबूत करेगी। साथ ही क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार और बिजली उत्पादन में वृद्धि से राष्ट्रीय ग्रिड को भी लाभ मिलेगा।

अटल टनल क्षेत्र के पास बनेगा बैराज

परियोजना का बैराज लाहुल घाटी के कोकसर क्षेत्र के निकट चंद्रा नदी पर प्रस्तावित है। वहीं सुरंग का निकास बिंदु मनाली के मढ़ी क्षेत्र के पास होगा।

इस योजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसके जरिए नदी के जल का नियंत्रित उपयोग किया जाएगा। सुरंग निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

निर्माण कार्यों के लिए विकसित होगा नया बुनियादी ढांचा

परियोजना के निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और उपकरणों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नई सड़कों का निर्माण भी किया जाएगा। कोकसर क्षेत्र से परियोजना स्थल तक संपर्क मार्ग विकसित किए जाएंगे ताकि निर्माण कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।

इसके अलावा भूमिगत ट्रांसफॉर्मर कैवर्न और 220 केवी क्षमता वाले आधुनिक सब-स्टेशन की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिससे उत्पादित बिजली के प्रभावी वितरण में मदद मिलेगी।

स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर

परियोजना निर्माण के दौरान निकलने वाले पत्थरों और मलबे का उपयोग निर्माण सामग्री के रूप में करने की योजना बनाई गई है। इससे निर्माण लागत कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को भी सीमित रखने का प्रयास किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। हिमाचल प्रदेश लंबे समय से जलविद्युत उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है और यह परियोजना उस क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ऊर्जा और जल प्रबंधन के लिए अहम पहल

केंद्र सरकार का मानना है कि जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से ऐसी परियोजनाएं भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ जल प्रबंधन की दक्षता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

आने वाले वर्षों में यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल हो सकती है और राज्य के जलविद्युत क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है।

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