हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई संबद्ध सरकारी स्कूलों में गणित और अंग्रेजी के विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। ये शिक्षक नियमित पाठ्यक्रम पढ़ाने के बजाय विद्यार्थियों की विषयगत कमजोरियों को दूर करने पर काम करेंगे। इस पहल को शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक नया प्रयोग शुरू किया है। इसके तहत गणित और अंग्रेजी विषय के विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, जिनकी भूमिका पारंपरिक अध्यापन से अलग होगी। ये शिक्षक छात्रों की सीखने संबंधी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष ध्यान देंगे।
सीखने की कमजोरियों पर रहेगा फोकस
शिक्षा विभाग ने सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इस पहल के तहत नियुक्त किए जा रहे शिक्षक नियमित पाठ्यक्रम पूरा कराने के बजाय उन छात्रों पर काम करेंगे जिन्हें गणित और अंग्रेजी विषय में अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।

विभाग का मानना है कि कई विद्यार्थी कक्षा के स्तर के अनुसार अपेक्षित दक्षता हासिल नहीं कर पाते। ऐसे में विशेष शिक्षकों की मदद से उनकी बुनियादी समझ और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकेगा।
600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया
शिक्षा विभाग के अनुसार सीबीएसई स्कूलों के लिए 308 गणित शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा 305 अंग्रेजी शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद इनके नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।
इन शिक्षकों को प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के साथ काम करना होगा। स्कूल प्रबंधन यह तय करेगा कि किस कक्षा में और किस समय इनकी सेवाओं का उपयोग किया जाएगा।
नियमित सिलेबस नहीं पढ़ाएंगे शिक्षक
नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि ये शिक्षक सामान्य विषय अध्यापकों की तरह पूरा सिलेबस नहीं पढ़ाएंगे। इनका मुख्य कार्य विद्यार्थियों की सीखने में मौजूद कमियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना होगा।
इसके लिए विभाग अलग से एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार करेगा। यह पाठ्यक्रम मौजूदा शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अतिरिक्त होगा और इसका उद्देश्य छात्रों की गणितीय तथा भाषाई दक्षता को मजबूत करना रहेगा।
पांच साल के लिए होगी नियुक्ति
इन शिक्षकों की नियुक्ति एक विशेष योजना के तहत पांच वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये का निश्चित मानदेय दिया जाएगा। हालांकि मानदेय वर्ष में केवल 10 महीने के लिए मिलेगा और अवकाश अवधि के दौरान भुगतान नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था स्कूलों में सीखने के स्तर को सुधारने और राष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप परिणाम हासिल करने में मदद करेगी।
शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
इस नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिक्षक संगठनों ने कुछ आपत्तियां भी जताई हैं। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट पदनाम के शिक्षकों की नियुक्ति भविष्य में प्रशासनिक और सेवा संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि नियुक्त शिक्षकों की भूमिका और पद संरचना स्पष्ट होनी चाहिए। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि यह एक विशेष शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में कमजोर छात्रों के लिए अलग सहायता व्यवस्था सकारात्मक परिणाम दे सकती है। देश के कई राज्यों में भी इस तरह के रेमेडियल एजुकेशन मॉडल पर काम किया जा रहा है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में हिमाचल प्रदेश के अन्य स्कूलों और विषयों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इससे विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार देखने को मिलेगा।











