दिल्ली में फिर गूंजा धमाका: 2011 के बाद राजधानी दहली, 11 की मौत, कई घायल

दिल्ली में फिर गूंजा धमाका: 2011 के बाद राजधानी दहली, 11 की मौत, कई घायल

भारत की राजधानी दिल्ली सोमवार शाम एक भीषण धमाके से दहल उठी। यह विस्फोट लाल किले के पास पार्किंग क्षेत्र में खड़ी एक कार में हुआ, जिसमें अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। 

Delhi Blast 2025: दिल्ली में लाल किले के पास हुए जोरदार धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 30 लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह धमाका लाल किले के पास पार्किंग में खड़ी एक कार में हुआ। धमाका इतना भीषण था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां आग की लपटों में घिर गईं और पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। 

मौके पर पहुंची दमकल की कई गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। शुरुआती जांच में इसे सीएनजी कार में आग लगने की घटना बताया गया था, लेकिन धमाके की तीव्रता को देखते हुए अब कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें घटना स्थल पर जांच में जुटी हुई हैं।

कैसे हुआ धमाका?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लाल किले के पास स्थित मेट्रो स्टेशन के नजदीक खड़ी एक कार में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। शुरुआती रिपोर्ट में इसे सीएनजी ब्लास्ट बताया गया था, लेकिन जांच अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट की तीव्रता और नुकसान का स्तर किसी सामान्य दुर्घटना से कहीं अधिक है।घटना के बाद पुलिस, दमकल, और एनएसजी की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।

दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा हाई अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि यह धमाका दुर्घटनावश हुआ या सुनियोजित आतंकी हमला था।

जांच में क्या सामने आया?

सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट स्थल से कार के मलबे और आसपास के सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं। ब्लास्ट में इस्तेमाल कार कथित तौर पर तीन घंटे से अधिक समय से पार्किंग में खड़ी थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वाहन में कोई विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी गई थी। एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सभी संभावनाओं पर जांच कर रही है, जिसमें आतंकी कोण भी शामिल है। गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि “दिल्ली विस्फोट की जांच के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहायता देगी। सभी पहलुओं की जांच हो रही है।

दिल्ली के धमाकों का इतिहास

यह धमाका इसलिए और चिंता का विषय है क्योंकि 2011 के बाद यह राजधानी में सबसे बड़ा विस्फोट माना जा रहा है। दिल्ली ने पिछले दो दशकों में कई भयावह धमाके देखे हैं—

  • 1997: करोल बाग में बम धमाके में 4 की मौत।
  • 2005: दिवाली से ठीक पहले सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में तीन बम धमाके — 60 से अधिक लोगों की मौत।
  • 2008: करोल बाग, कनॉट प्लेस और जीके-1 में एक साथ कई विस्फोट — 26 मारे गए।
  • 2011: दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर बम धमाका — 15 लोगों की मौत।

इन घटनाओं के बाद राजधानी की सुरक्षा को लेकर कई बड़े कदम उठाए गए — सीसीटीवी नेटवर्क बढ़ाना, सुरक्षा जांच कड़ी करना और खुफिया एजेंसियों को सशक्त बनाना। इसके बाद से दिल्ली में लंबे समय तक कोई बड़ा धमाका नहीं हुआ था।

 

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