Perplexity CEO की चेतावनी: AI गर्लफ्रेंड का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक

Perplexity CEO की चेतावनी: AI गर्लफ्रेंड का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक

दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे AI गर्लफ्रेंड और कंपेनियन ऐप्स को लेकर Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे चैटबॉट्स मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं और लोगों को वास्तविकता से दूर ले जा रहे हैं। श्रीनिवास के मुताबिक, यह वर्चुअल रिलेशनशिप भविष्य में गंभीर मनोवैज्ञानिक जोखिम पैदा कर सकता है।
 
AI Girlfriend Apps Threat: दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे AI गर्लफ्रेंड और वर्चुअल पार्टनर ऐप्स अब चिंता का कारण बन रहे हैं। हाल ही में Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने इन एप्लिकेशंस के इस्तेमाल को लेकर चेताया है। उन्होंने कहा कि AI चैटबॉट्स इंसानों जैसी बातचीत करने लगे हैं और लोग इनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने लगे हैं। श्रीनिवास के अनुसार, यह ट्रेंड लोगों के मानसिक संतुलन और सामाजिक व्यवहार के लिए खतरनाक है क्योंकि यह असली और वर्चुअल जीवन के बीच की रेखा मिटा रहा है।
 
AI गर्लफ्रेंड ऐप्स को लेकर चेतावनी
 
दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही AI गर्लफ्रेंड और वर्चुअल पार्टनर ऐप्स अब चिंता का कारण बन रही हैं। परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने हाल ही में कहा कि ये डिजिटल रिलेशनशिप सिस्टम खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि इनमें मनोवैज्ञानिक जोखिम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लोग अब इन ऐप्स पर कई घंटे बिताने लगे हैं, जिससे वे वास्तविक दुनिया से कटते जा रहे हैं।
श्रीनिवास ने कहा कि AI कंपेनियन ऐप्स लगातार एडवांस हो रही हैं। ये न सिर्फ बातचीत याद रखती हैं बल्कि इंसानों जैसी प्रतिक्रियाएं भी देती हैं। ऐसे में लोग इनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने लगते हैं, जो लंबे समय में उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
 
रियल और वर्चुअल रिश्तों की सीमाएं धुंधली
 
श्रीनिवास के मुताबिक, AI चैटबॉट्स का उपयोग अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। कई लोग इन्हें रिलेशनशिप का विकल्प मानने लगे हैं, जिससे उनका “रियल कनेक्शन” कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड एक ऐसे दौर की शुरुआत कर रहा है, जहां इंसान और मशीन के बीच की भावनात्मक दूरी मिटती जा रही है।
एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि AI गर्लफ्रेंड ऐप्स का लगातार उपयोग रिश्तों की परिभाषा बदल सकता है। इससे लोगों की सोच और सामाजिक व्यवहार प्रभावित हो सकते हैं। कई साइकोलॉजिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि इन वर्चुअल रिलेशनशिप से वास्तविक जीवन में जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना कमजोर होती है।
 
AI कंपेनियन ऐप्स का बढ़ता चलन
 
Perplexity CEO की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब AI पार्टनर ऐप्स की संख्या दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। इन ऐप्स के जरिए यूजर्स वर्चुअल बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड से चैट कर सकते हैं, जो भावनात्मक सपोर्ट देने का दावा करती हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ये ऐप्स वास्तविक और काल्पनिक जीवन के बीच फर्क मिटा रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Common Sense Media की एक स्टडी में पाया गया कि लगभग 72 प्रतिशत टीनएजर्स ने कम से कम एक बार AI गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड ऐप का इस्तेमाल किया है। रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसी ऐप्स पर बढ़ती निर्भरता युवाओं के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
 
टेक एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
 
कई तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI चैटबॉट्स को भावनात्मक सपोर्ट सिस्टम बनाना खतरनाक हो सकता है। ये सिस्टम डेटा से यूजर की पसंद और आदतें सीखते हैं और उसके अनुसार प्रतिक्रियाएं देते हैं। लंबे समय में यह इंसान के निर्णय लेने की क्षमता पर असर डाल सकता है। 
श्रीनिवास ने यह भी कहा कि जो लोग रोजाना कई घंटे ऐसे चैटबॉट्स से बातचीत करते हैं, वे एक अलग ही वर्चुअल रियलिटी में जीने लगते हैं। इससे उनका दिमाग आसानी से प्रभावित और नियंत्रित किया जा सकता है।

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