शानदार अदायगी और यादगार किरदारों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री दिव्या दत्ता इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘चिरैया’ को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरीज में उन्होंने मैरिटल रेप, शादी और औरतों के एम्पावरमेंट जैसे संवेदनशील मुद्दों को बखूबी पर्दे पर पेश किया है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: Divya Dutta आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। पंजाबी फिल्मों से लेकर बॉलीवुड और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म तक की दुनिया में वह धूम मचा रही हैं। साल 1994 में एक्टिंग डेब्यू करने के बाद दिव्या दत्ता ने अपने 32 साल लंबे करियर में कई तरह के किरदार निभाए और अपनी पहचान पुख्ता की।
2017 में आई फिल्म Irada के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं दिव्या दत्ता इस वक्त अपनी नई सीरीज Chiraiya को लेकर चर्चा में हैं, जो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है।
‘चिरैया’ और महिलाओं को एम्पावर करना
दिव्या दत्ता ने बताया कि उनकी नई सीरीज ‘चिरैया’ में दर्शाया गया किरदार समाज में महिलाओं के लिए आवाज उठाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा,
'बहुत जरूरी है क्योंकि हमारे समाज में बहुत सी औरतें अपने लिए बोल नहीं पातीं। ऐसे में, कोई अपना नजरिया साइड में रखकर आपको सुने, एक-दूसरे को थामे तो हमारे समाज के लिए बहुत खूबसूरत बात होगी।'
वह आगे बताती हैं कि ‘चिरैया’ में दिखाया गया रिश्ता केवल खून का नहीं बल्कि जेठानी और देवरानी के बीच का है। यह कहानी महिलाओं के बीच सपोर्ट और सिस्टरहुड का संदेश देती है। दिव्या के अनुसार, यह दिखाना कि एक महिला दूसरी महिला के लिए खड़ी हो सकती है, समाज के लिए बहुत मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अक्सर यही माना जाता है कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है, जबकि वास्तव में महिलाओं का समर्थन और एम्पावरमेंट जरूरी है।
शादी और पर्सनल लाइफ पर खुलासा

दिव्या दत्ता ने शादी और निजी जिंदगी के सवालों पर भी साफ-साफ अपनी राय रखी। उन्होंने कहा,
'हर कोई मुझसे शादी को लेकर पूछता है। मुझे लगता है कि मुझे इसका जवाब ही नहीं देना है। इसमें धारणा तोड़ने जैसी बात ही नहीं है। यह मेरी जिंदगी है। मैं जैसा चाहूंगी वैसा करूंगी और इसके लिए किसी को जस्टिफाई करने की जरूरत नहीं है।'
वह अपने परिवार से मिली आज़ादी और आत्मनिर्भरता के बारे में भी बताती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां सिंगल मदर थीं और उन्होंने हमेशा दिव्या को अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी दी। अगर कोई मुझे किसी चीज के लिए रोकता है, मुझे पसंद नहीं। जहां मुझे लगता है बोलना चाहिए, मैं बोल देती हूं। दिव्या की यह बात उनके फैंस को उनके स्वतंत्र और सशक्त व्यक्तित्व की झलक देती है।
पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ जागरूकता
दिव्या ने अपने इंटरव्यू में यह भी बताया कि पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ उनकी संवेदनशीलता और जागरूकता उन्हें हमेशा प्रेरित करती रही है। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाएं अक्सर अपने अधिकारों और इच्छाओं के लिए खामोश रहती हैं। इसीलिए ‘चिरैया’ जैसी सीरीज का होना और महिलाओं के अधिकारों और आवाज को दिखाना महत्वपूर्ण है।
मेरी मां ने मुझे हमेशा कहा कि अगर आप एक्टर बनना चाहती हो, तो बनो। इस आज़ादी ने मुझे यह समझाया कि किसी के दबाव में जीवन नहीं जीना चाहिए। इस बात से साफ होता है कि दिव्या अपने किरदार और पर्सनल जीवन दोनों में स्वतंत्र निर्णय और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देती हैं। दिव्या दत्ता का मानना है कि समाज में हर किसी का अपना नजरिया होता है।
शादी करना हो या न करना, अपने लिए बोलना या चुप रहना – किसी को भी गलत ठहराया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी आवाज़ उठाने, अधिकार मांगने और सपोर्ट पाने का हक होना चाहिए।








