कर्नाटक के लंबित बकाये पर वित्त मंत्री से मिली ‘खुशखबरी’: डीके शिवकुमार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने GST काउंसिल की बैठक के बाद राज्य के लंबित बकाये पर खुशखबरी मिलने की बात कही। वहीं, 93 शहरी निकायो के लिए ₹299.74 करोड़

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने GST काउंसिल की बैठक के बाद कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य के लंबित बकाये पर अच्छी खबर दी है। उन्होंने विवरण साझा नहीं किया। राज्य ने शहरी निकायों की लंबित ग्रांट जारी करने की मांग भी उठाई।

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य के लंबे समय से लंबित बकाये को लेकर उन्हें कुछ ‘अच्छी खबर’ दी है। हालांकि, उन्होंने इस बातचीत का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। शिवकुमार ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की बैठक के बाद की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने वित्त मंत्री के सामने कर्नाटक के लंबित बकाये का मुद्दा उठाया। बैठक को उन्होंने सकारात्मक बताया और कहा कि राज्य की ओर से रखे गए बिंदुओं को स्वीकार किया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि केंद्र से किस तरह की राहत, भुगतान या समयसीमा का संकेत मिला है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कर्नाटक सरकार केंद्र से राज्य के वित्तीय बकाये के साथ-साथ शहरी स्थानीय निकायों के लिए लंबित अनुदान जारी करने की मांग कर रही है। राज्य के शहरी विकास मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया ने भी 15वें वित्त आयोग के तहत पात्र शहरी निकायों को मिलने वाली राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया है।

वित्त मंत्री से बातचीत के बाद शिवकुमार का बयान

GST परिषद की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राज्य के लंबित बकाये का विषय केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष उठाया था। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि केंद्र की ओर से किस तरह की राहत मिलने की संभावना है, तो उन्होंने फिलहाल अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस समय मामले पर और कुछ नहीं बताएंगे तथा बाद में जानकारी साझा करेंगे। उनके बयान से संकेत मिलता है कि केंद्र के साथ इस मुद्दे पर बातचीत हुई है, लेकिन किसी औपचारिक निर्णय, राशि या भुगतान की तारीख की घोषणा नहीं की गई।

इसलिए फिलहाल इसे कर्नाटक के लिए संभावित सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, न कि लंबित बकाये के भुगतान की पुष्टि के रूप में। वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा या भुगतान संबंधी दस्तावेज का इंतजार करना होगा।

GST परिषद में कर वसूली और गिरफ्तारी पर चर्चा

बैठक में GST का भुगतान नहीं करने वाले कारोबारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और गिरफ्तारी जैसे कदमों पर भी चर्चा हुई। शिवकुमार ने कहा कि कर वसूली की प्रक्रिया लागू नियमों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।

उन्होंने आयकर कानून के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों को कारोबारियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, बकाया कर की वसूली पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

शिवकुमार ने बताया कि चर्चा के दौरान गिरफ्तारी को उचित कदम नहीं मानने की बात सामने आई और एक राज्य को छोड़कर अन्य राज्यों ने इस दृष्टिकोण से सहमति जताई। हालांकि, बैठक में हुई चर्चा और किसी औपचारिक निर्णय के बीच अंतर करना जरूरी है। गिरफ्तारी और कर वसूली से जुड़े नियम संबंधित कानूनों तथा परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

GST परिषद केंद्र और राज्यों के बीच अप्रत्यक्ष कर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच है। इसके फैसले कारोबारियों, कर प्रशासन और राज्यों के राजस्व से संबंधित नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

GST बैठकों में मुख्यमंत्री की भागीदारी क्यों चर्चा में रही?

शिवकुमार की बैठक में मौजूदगी ने कर्नाटक की शासन व्यवस्था की एक खास परंपरा की ओर भी ध्यान खींचा। समाचार रिपोर्ट में उद्धृत सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक में मुख्यमंत्रियों द्वारा वित्त विभाग अपने पास रखने की परंपरा रही है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे कुछ बड़े राज्यों में मुख्यमंत्री सामान्यतः वित्त विभाग किसी अन्य मंत्री को सौंपते हैं।

रिपोर्ट में इस परंपरा की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े से जोड़ी गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में विभागों का बंटवारा राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासनिक जरूरतों और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार बदल सकता है।

मुख्यमंत्री के पास वित्त विभाग होने से राज्य के बजट, राजस्व और केंद्र के साथ वित्तीय मामलों पर सीधा नियंत्रण रह सकता है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री की व्यस्त दिनचर्या के कारण हर तीन या चार महीने में होने वाली GST परिषद की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि शिवकुमार भविष्य में परिषद की सभी बैठकों में भाग लेंगे या नहीं। इस संबंध में किसी अंतिम व्यवस्था की पुष्टि नहीं हुई है।

GST परिषद की बैठक का एजेंडा और लंबित बकाये का मुद्दा

रिपोर्ट में उद्धृत सूत्रों के अनुसार, GST परिषद की बैठकें निर्धारित एजेंडे के आधार पर चलती हैं। यदि कोई सदस्य सूचीबद्ध एजेंडे से बाहर का मुद्दा उठाता है, तो उसे आगे विचार के लिए संबंधित समिति के पास भेजा जा सकता है।

इस प्रक्रिया को देखते हुए यह संभावना जताई गई है कि शिवकुमार और केंद्रीय वित्त मंत्री के बीच राज्य के लंबित बकाये पर बातचीत औपचारिक बैठक के एजेंडे से अलग हुई हो। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि बातचीत किस मंच पर हुई या केंद्र ने क्या आश्वासन दिया।

केंद्र और राज्यों के बीच बकाये का प्रश्न वित्तीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राज्य सरकारें विभिन्न योजनाओं, स्थानीय निकायों और बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्चों के लिए निर्धारित अनुदानों तथा राजस्व हस्तांतरण पर निर्भर करती हैं। भुगतान में देरी होने पर संबंधित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव पड़ सकता है।

93 शहरी निकायों के लिए ₹299.74 करोड़ की ग्रांट लंबित

कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य के पात्र शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए लंबित अनुदान जल्द जारी करने की मांग की है।

मंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव सत्येंद्र सिंह से मुलाकात की और इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। मंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्नाटक के शहरी निकायों को 15वें वित्त आयोग के तहत कुल ₹1,385 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

इसमें से ₹498 करोड़ बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के लिए और ₹887 करोड़ राज्य के अन्य 316 शहरी स्थानीय निकायों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

बयान के अनुसार, पात्रता मानदंड पूरे करने वाले 93 शहरी निकायों के लिए ₹299.74 करोड़ की राशि अभी जारी नहीं हुई है। राज्य सरकार ने केंद्र से इस अनुदान को जल्द जारी करने का अनुरोध किया है।

यह राशि स्थानीय स्तर पर शहरी सेवाओं और विकास संबंधी जरूरतों के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि राशि जारी करने में देरी का कारण क्या है या भुगतान के लिए केंद्र ने कोई निश्चित समयसीमा दी है।

शहरी निकायों के लिए अनुदान क्यों महत्वपूर्ण है?

शहरी स्थानीय निकाय शहरों में बुनियादी सेवाओं और नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके कामकाज में स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की योजना बनाना और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना शामिल है।

15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाले अनुदान स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए निर्धारित किए जाते हैं। पात्र निकायों को राशि समय पर मिलने से उन्हें स्वीकृत योजनाओं और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

कर्नाटक सरकार की मांग ऐसे समय आई है, जब राज्य केंद्र से लंबित वित्तीय मामलों पर बातचीत कर रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से बकाये के मुद्दे पर सकारात्मक संकेत मिलने और शहरी निकायों के लिए अनुदान जारी करने की मांग को राज्य के वित्तीय हितों से जुड़े दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के रूप में देखा जा सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्रीय वित्त मंत्री से हुई बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए राज्य के लंबित बकाये के संबंध में किसी निश्चित भुगतान या समझौते की पुष्टि नहीं की जा सकती।

इसी तरह, शहरी स्थानीय निकायों के लिए लंबित ₹299.74 करोड़ के अनुदान पर भी केंद्र की ओर से भुगतान की तारीख या अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आगे की स्थिति केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया, वित्तीय आवंटन से जुड़े दस्तावेजों और राज्य सरकार की घोषणाओं से स्पष्ट होगी। कर्नाटक के लिए प्रमुख मुद्दा यह रहेगा कि लंबित वित्तीय दावों पर क्या प्रगति होती है और पात्र शहरी निकायों को निर्धारित अनुदान कब तक मिलता है।

निष्कर्ष: GST परिषद की बैठक के बाद शिवकुमार का बयान कर्नाटक के लंबित बकाये पर संभावित सकारात्मक प्रगति का संकेत देता है, लेकिन अभी कोई निश्चित भुगतान घोषित नहीं हुआ है। इस बीच, राज्य ने 93 पात्र शहरी निकायों के लिए ₹299.74 करोड़ की लंबित ग्रांट जल्द जारी करने की मांग केंद्र के सामने रखी है।

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