बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र पर सांप ने काटा, 5 साल के बच्चे की मौत; अस्पताल भेजने के बजाय घर लौटाने का आरोप, ग्रामीणों ने किया हंगामा

पटना के बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र पर सांप के काटने से 5 साल के इशु कुमार की मौत हो गई। परिजनों ने सहायिका पर लापरवाही का आरोप लगाया, ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया
बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र पर सांप ने काटा, 5 साल के बच्चे की मौत; अस्पताल भेजने के बजाय घर लौटाने का आरोप, ग्रामीणों ने किया हंगामा
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पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बेढ़ना पंचायत के पोथमा पर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने गए पांच साल के बच्चे की सांप के काटने से मौत हो गई। मृतक की पहचान टुनटुन महतो के बेटे इशु कुमार के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि सांप के काटने की जानकारी देने के बावजूद आंगनबाड़ी सहायिका ने बच्चे को अस्पताल पहुंचाने या उसके परिवार को तत्काल सूचना देने के बजाय पैदल घर भेज दिया। बच्चे की मौत की खबर फैलते ही गांव में आक्रोश फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया और बच्चे के लिए न्याय की मांग उठाई।

परिजनों के मुताबिक, इशु रोज की तरह बुधवार को आंगनबाड़ी केंद्र गया था। वहां भोजन करने के बाद वह हाथ धोने के लिए केंद्र के पास स्थित चापाकल की ओर गया। इसी दौरान उसकी उंगली में सांप ने काट लिया। बच्चे ने इसकी जानकारी आंगनबाड़ी सहायिका को दी थी। परिवार का आरोप है कि घटना की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाने के बजाय बच्चे को अकेले पैदल घर जाने के लिए कह दिया गया। बताया गया है कि आंगनबाड़ी केंद्र से उसका घर करीब 50 मीटर की दूरी पर था। बच्चा किसी तरह घर पहुंचा और अपनी मां को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है।

बच्चे के घर पहुंचने के बाद परिवार को घटना की जानकारी मिली तो परिजन घबरा गए। परिवार का आरोप है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्र की ओर से तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाती या परिवार को तत्काल सूचना दी जाती, तो बच्चे को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकती थी। हालांकि, बच्चे की जान बचाई जा सकती थी या नहीं, इसका निर्धारण चिकित्सकीय तथ्यों और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल इस मामले में परिजनों की मुख्य शिकायत यह है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में बच्चे को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाने के बजाय घर भेज दिया गया।

परिजनों के अनुसार, बच्चे को सांप काटने के बाद आसपास के लोगों की सलाह पर वे उसे पहले बड़हिया ले गए, जहां झाड़-फूंक कराने की बात सामने आई है। वहां बच्चे को मृत बताया गया। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार बच्चे को लेकर बड़हिया, शेखपुरा और बाढ़ के अस्पतालों तक पहुंचा, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक छोटे बच्चे की मौत से घर में मातम छा गया और गांव के लोगों में भी गहरा आक्रोश देखने को मिला।

घटना के बाद लोगों का गुस्सा आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था और वहां मौजूद कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर बढ़ गया। ग्रामीणों और परिजनों ने सवाल उठाया कि छोटे बच्चों की देखभाल के लिए संचालित केंद्र में इस तरह की आपात स्थिति आने पर तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उनका आरोप है कि बच्चे को सांप काटने की जानकारी मिलने के बाद भी न तो उसे अस्पताल ले जाया गया और न ही उसके परिवार को समय पर सूचना दी गई। परिजन चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उसका शव सड़क पर रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग-30ए को जाम कर दिया। इससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ। प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि घटना की जांच कराई जाए, जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता मिले। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। मांगों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने और सरकारी प्रावधानों के अनुसार सहायता दिलाने का आश्वासन मिलने के बाद जाम हटाया गया।

इस घटना ने आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चे भोजन, शुरुआती शिक्षा और देखभाल के लिए आते हैं। ऐसे में केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने या भोजन वितरण तक सीमित नहीं होती। बच्चों की सुरक्षा पर नजर रखना, किसी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मदद करना और उनके अभिभावकों को सूचना देना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

सांप के काटने जैसी घटना को गंभीर चिकित्सा आपातस्थिति माना जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को बिना देरी नजदीकी अस्पताल पहुंचाना और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों के चक्कर में समय गंवाना जोखिम बढ़ा सकता है। इस मामले में भी परिवार के अस्पताल पहुंचने से पहले झाड़-फूंक कराए जाने की बात सामने आई है। इसलिए घटना की जांच में केवल आंगनबाड़ी केंद्र की भूमिका ही नहीं, बल्कि सर्पदंश के बाद बच्चे को उपचार के लिए ले जाने में हुए पूरे घटनाक्रम को समझना भी महत्वपूर्ण होगा।

परिजनों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र मध्य विद्यालय बेढ़ना के परिसर में संचालित होता है, जहां शिक्षक और आंगनबाड़ी सहायिका मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद बच्चे को कथित तौर पर अकेले घर भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। परिवार का सवाल है कि जब बच्चा केंद्र में मौजूद था और वहीं सांप ने उसे काटा, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी और घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई। इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच और अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।

मामले में संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) से भी पक्ष जानने की कोशिश किए जाने की खबर है, लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका। इस वजह से घटना को लेकर विभाग का आधिकारिक पक्ष तत्काल सामने नहीं आया। ऐसे में परिजनों के आरोपों और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है। सहायिका पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों की मांग है कि इस घटना को गंभीरता से लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी बच्चे के साथ ऐसी स्थिति होने पर समय पर इलाज और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की देखरेख के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए और किसी भी आपात स्थिति में कर्मचारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। यदि केंद्र परिसर में सांप या अन्य खतरनाक जीवों का खतरा है, तो परिसर की नियमित सफाई, आसपास की झाड़ियों को हटाने और बच्चों के आने-जाने वाले स्थानों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

बच्चे की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पांच साल की उम्र में इशु का जीवन समाप्त हो जाना पूरे गांव के लिए दुखद घटना है। अब परिवार और ग्रामीण चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, कथित लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जाए और पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता मिले। प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बच्चों की देखभाल से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया की जरूरत की याद दिलाती है। किसी भी केंद्र में बच्चे की तबीयत बिगड़ने या चोट लगने पर तत्काल अभिभावकों को सूचना देना और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करना प्राथमिकता होनी चाहिए। बाढ़ के पोथमा पर गांव की इस घटना में भी अब यही सवाल सबसे अहम है कि सांप के काटने के बाद बच्चे को तुरंत अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया और क्या जांच के जरिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी।

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