डोनाल्ड ट्रंप की भारत को नई टैरिफ चेतावनी, रूस से तेल खरीद पर बढ़ा दबाव

डोनाल्ड ट्रंप की भारत को नई टैरिफ चेतावनी, रूस से तेल खरीद पर बढ़ा दबाव

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैक्स से अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा है, जिसका सीधा असर द्विपक्षीय व्यापार पर दिख रहा है। व्यापार में उतार-चढ़ाव से निर्यात, आयात और निवेश प्रभावित हो सकते हैं, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक दबाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।

Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नए टैरिफ (tariff) लगाने की धमकी दी है। इस बार मुद्दा रूस से कच्चे तेल की खरीद का है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर भारत इस मामले में अमेरिका का सहयोग नहीं करता है, तो उस पर लगाए जाने वाले टैक्स को और बढ़ाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते पहले से ही दबाव में हैं और दोनों देशों के बीच एक बड़े व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है।

यह चेतावनी न केवल राजनीतिक स्तर पर अहम मानी जा रही है, बल्कि इसका सीधा असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ट्रंप के इस बयान ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

रूस से तेल खरीद बना विवाद की वजह

सोमवार, 5 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक ऑडियो में डोनाल्ड ट्रंप भारत को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए सुने गए। उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं देता है, तो अमेरिका भारत पर टैक्स बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला बहुत जल्दी लिया जा सकता है और इसके लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा।

अमेरिका रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर किसी भी तरह की ढील के मूड में नहीं है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि रूस से तेल खरीदना उसके आर्थिक दबाव की नीति को कमजोर करता है। इसी कारण भारत पर पहले से लगाए गए टैरिफ को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

पीएम मोदी को लेकर ट्रंप की टिप्पणी

सख्त चेतावनी के बीच ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने पीएम मोदी को “अच्छे आदमी” बताते हुए कहा कि भारत उन्हें खुश करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि वे इस मुद्दे पर खुश नहीं थे और उनके लिए यह जरूरी था कि अमेरिका को संतुष्ट किया जाए।

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत व्यापार करता है और अमेरिका के पास यह विकल्प मौजूद है कि वह बहुत जल्दी भारत पर टैक्स बढ़ा दे। इस बयान में एक तरफ तारीफ दिखी, तो दूसरी तरफ दबाव की रणनीति भी साफ नजर आई। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ दबाव की नीति को भी समान रूप से इस्तेमाल कर रहा है।

भारत पर पहले से ऊंचा टैरिफ लागू

अमेरिका पहले ही भारत पर भारी टैरिफ लगा चुका है। वर्तमान में भारत पर कुल 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू है, जिसमें से 25 प्रतिशत पेनाल्टी (penalty) के तौर पर जोड़ा गया था। यह पेनाल्टी खास तौर पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाई गई थी।

ट्रंप के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जिन पर अमेरिका ने सबसे ज्यादा टैक्स बढ़ाया है। पहले यह दर 10 प्रतिशत थी, फिर 7 अगस्त को इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया। इसके बाद साल के अंत तक यह 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। इतनी ऊंची दर ने भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर सीधा असर डाला है।

बीटीए बातचीत के बीच बढ़ा तनाव

भारत और अमेरिका इस समय एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी बीटीए (Bilateral Trade Agreement) पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों की कोशिश है कि इस समझौते का पहला फेज जल्द पूरा किया जाए और इसे सार्वजनिक किया जाए। माना जा रहा है कि यह समझौता व्यापार में स्थिरता और भरोसा लौटाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो बीटीए की राह और मुश्किल हो सकती है। इसके बावजूद, दोनों देशों की सरकारें बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहती हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार में गिरावट के आंकड़े

टैरिफ और राजनीतिक दबाव का असर अब आंकड़ों में भी दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) द्वारा दिसंबर में किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारत का अमेरिका को निर्यात मई से सितंबर 2025 के बीच 37.5 प्रतिशत घट गया है। यह निर्यात 8.8 अरब डॉलर से घटकर 5.5 अरब डॉलर पर आ गया।

यह गिरावट पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। इससे साफ होता है कि ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित व्यापार माहौल ने भारतीय निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी से जुड़े सेक्टर पर इसका असर ज्यादा देखा गया है।

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