खगड़िया जिले में समाजवादी विचारधारा के प्रणेता डॉ. राममनोहर लोहिया की जयंती पूरे सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान लोहिया जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके विचारों को याद किया गया।
इस मौके पर उपस्थित MLA ने कहा कि डॉ. लोहिया केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि समाज में बराबरी और न्याय की आवाज थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में महिलाओं, पिछड़े वर्गों और गरीबों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को उसका हक नहीं मिलेगा, तब तक सच्चा विकास संभव नहीं है।
MLA ने अपने संबोधन में कहा कि लोहिया जी का जीवन सादगी और संघर्ष का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा सरल जीवन जीते हुए समाज के लिए बड़े-बड़े काम किए। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और सत्ता को कभी भी व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया। यही वजह है कि आज भी उनके विचार प्रासंगिक हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने लोहिया जी के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि लोहिया जी ने ‘समानता’ को केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक आंदोलन के रूप में देखा। उन्होंने जाति व्यवस्था, लैंगिक भेदभाव और आर्थिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को एक नई दिशा दी।
इस अवसर पर यह भी कहा गया कि आज के समय में लोहिया जी के विचारों को अपनाना और भी जरूरी हो गया है। समाज में बढ़ती असमानता और भेदभाव को खत्म करने के लिए उनके सिद्धांत मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं। खासकर युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने लोहिया जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई सोच दी, जिसमें आम आदमी को केंद्र में रखा गया। उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।
अंत में सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे लोहिया जी के बताए रास्ते पर चलकर समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए काम करेंगे। खगड़िया में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि उनके विचारों को आगे बढ़ाने का एक प्रयास भी था